Success Story C A Rahul Malodia Networth

Introduction to C A Rahul Malodia

Rahul Malodia Success story – C A Rahul Malodia Networth सीए राहुल मालोदिया, मालोदिया बिजनेस कोचिंग प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और सीईओ हैं। लिमिटेड वह एक बिजनेस कोच, मेंटर और निवेशक हैं। उन्होंने पूरे भारत में 25,000 से अधिक व्यवसायियों को प्रशिक्षित किया है।
राहुल मालोदिया वाणिज्य में स्नातक की डिग्री के साथ एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) हैं।
राहुल मालोदिया 10 वर्षों से बिजनेस कंसल्टेंट के रूप में काम कर रहे हैं। वह एक संरक्षक, सलाहकार, बिजनेस कोच और उद्यमी हैं जो कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर जाने जाते हैं। 2022 तक, राहुल मालोदिया की अनुमानित कुल संपत्ति $3-$4 मिलियन है।

9 साल का था जब मेरे पिताजी एक्सपाइर हो गए थे।

9 साल का था जब मेरे पिताजी एक्सपाइर हो गए थे। फाइनैंशल स्थिति कुछ ऐसी थी, ना पढ़ाई के पैसे थे, ना कोचिंग के बिना किताबों के और हर चीज़ के लिए जो बचपन में शौक होते हैं। आदमी यह करना चाहता है वो करना चाहता है। बचपन में बहुत सारी चीज़े है कुछ नहीं कर पाए लेकिन कट टू  कट लाइफ राइट नाउ कंडीशन ऐसी है की 2,00,000 से ज्यादा बिजनेसमैन को ट्राइन कर चूके हैं। 500 से ज्यादा बिजनेसमैन की पर्सनल हैंड होल्डिंग करते हैं, उनमें से 100 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनका टर्नओवर ज़ीरो से स्टार्ट करवाके 100 Cr  से ऊपर हम अभी तक ले जा चूके हैं और अगले 5 साल में 50 IPO लाने वाले हैं। अब एक सवाल आता है कि इतनी टफ कंडीशन थी और अब इतना सक्सेस फ्यूचर है तो आखिर बीच में ऐसा क्या हुआ? ये कहानी पूरी उसके ऊपर।  किसको बिज़नेस करना चाहिए, कब बिज़नेस करना चाहिए और बिज़नेस में किस चीज़ का ध्यान रखना चाहिए? तो शुरुआत करते है मेरी कहानी से आई होप आप को Inspire कर पाएगी, कुछ करने के लिए प्रेरित कर पाएगी।

कहानी शुरू होती है 1989 में मेरा बर्थ हुआ। पिताजी डॉक्टर थे और लंदन से करके आये थे। काफी फाइनैंशली अच्छी फैमिली थी, उसमें कोई इश्यू नहीं था, लेकिन ये सब अच्छा चला। बचपन में 9 साल की उम्र तक 9 साल की उम्र तक आप मेरी लाइफ देख सकते हैं। एक तरह के राजकुमार जी की लाइफ थी क्योंकि मेरे पिताजी का सोशल सर्विस ज्यादा था और वो ऐसे गांव में वर्क करते थे जहाँ पे पांच गांव में आसपास कोई डॉक्टर नहीं था। इकलौता डॉक्टर उनका इकलौता बेटा आप समझ सकते हैं किस तरह से और उस गांव में बहुत अच्छी लाइफ जी रहे थे लेकिन 9 साल की उम्र में मेरे पिताजी एक्सपाइर हो गये और कुछ पैटर्नल कंडीशन दादाजी पिताजी की तरफ से कुछ ऐसी कंडीशन रही की मैं 9 साल के बाद वहाँ नहीं रह पाया

आना पड़ा मेरे ननिहाल जयपुर


मुझे आना पड़ा मेरे ननिहाल जयपुर सो 1998 में मैं जब जयपुर आया मेरे ननिहाल तो कंडीशन ऐसी ति कि  पांच कमरों का एक घर था और 22 जनों की फैमिली थी। जॉइंट फैमिली थी और बहुत ज्यादा पैसे वाले नहीं थे और बिज़नेस फैमिली से कोई नहीं था और सब छोटी मोटी जॉब करते थे। मेरे नाना जी की चाय की दुकान थी, मंदिर में पूजा सेवा करते थे।  तो मेरे मामा वगैरह ने बचपन में भी कप्ले धोए थे तो ऐसा सीन था की अच्छा ये आ गया। कोई बात नहीं अब आ गया है। ये भी कप्ले धोएगा पर मम्मी ने कहा नहीं यहाँ डॉक्टर का बेटा है और बच्चा इंटेलीजेंट है  कुछ करना चाहता है तो इसको हम करने का कुछ मौका देंगे तो उनका ठीक है। चलो कोई बात नहीं थोड़ा और पढ़ा लो। अभी तो बच्चा है, 9 साल का है, 12,13 साल तक पढ़ा लो फिर लगा लेगा तो फिर मैं एक फिफ्थ क्लास में एक स्कूल में पढ़ाई इंग्लिश मीडियम स्कूल था।

चौथी क्लास तक में हिंदी में था

जिंदगी में पहली बार इंग्लिश की तरफ गया कि चौथी क्लास तक में हिंदी में था। हिंदी मीडियम मतलब गुड मॉर्निंग सर वाले नहीं आचार्यजी प्रणब वाले स्कूल में मैं था तो फिर इंग्लिश टफ थी। धीरे धीरे सीखा और फिफ्थ क्लास में वो स्कूल टॉप किया, लेकिन पैसे उसे स्कूल की फीस थी। 200 ₹300 वो भी देना बहुत बड़ी बात थी तो दूसरे स्कूल में गया जहाँ फीस माफ़ हो सके। वैसे स्कूल में हम गए सिक्स सेवन डेट्स तो आ गया, उसको टॉप एट्थ क्लास हुई। अब घरवालों ने कहा अब तो उसको जॉब पे लगा देते हैं। सिक्स्थ क्लास में मैंने टाइपिंग से की थी की यार ये इसको कोर्ट के बाहर कहीं पे इस टाइप करेगा ₹5 एक पेज ₹10 भेजकर उसको मिल जाएंगे, कई चार 5000 में किसी का असिस्टेंट बना देंगे। ये थी तो नाइन्थ में कोई पढ़ाना नहीं चाहता था, लेकिन मैं अकेला खुद की साइकिल लेके अलग अलग स्कूलों में गया। मैंने कहा भैया मुझे पढ़ना है, मुझे पढ़ना है। लोगों ने कहा है,

सेक्शन और स्कूल टॉप किया

नाइन्थ क्लास का एक बच्चा है, साइकल से आ रहा है और आगे कहता है की भाई साहब मेरे को पढ़ना है, मेरे को स्कॉलरशिप दे दो, मेरे पास पैसे नहीं हैं तो किसी ने एक ने कहा की देखो अगर हमारे स्कूल टॉप करोगे तो हम आपको भेज देंगे मैंने कहा सर एक काम करो, आप मेरा नाम लिख दो स्कूल में अगर मैं फेल हो जाऊं तो मुझे आप हटा देना। नहीं तो भाई साहब मेरे को अब रख ही लेना तो नाइन्थ क्लास में मैंने मेरी क्लास और सेक्शन और स्कूल टॉप किया तो टेंथ 11,12 तक मेरे को फ्री में पढ़ने को मिला इलेवेंथ क्लास में जो मैंने कॉमर्स लिया, सब जने करते है, इतना इंटेलीजेंट बच्चा है, इन बच्चों का क्या होता है? साइंस लेता है, लेकिन भैया साइनस मैंने कहा नहीं साइंस लेंगे, किसी ने कहा भाई घरवालों के कपड़े बिक जाएंगे भाई तेरे पास पैसे नहीं है कोचिंग के  किताबों के कॉमर्स ले ले, उसमें क्या है? पार्ट टाइम अर्निंग जल्द ही चालू हो जाती है और बहुत ज्यादा पैसा भी नहीं लगता तो मैंने इसलिए कॉमर्स किया। मैंने कहा आप कुछ करना चालू कर देंगे, कमाई चालू हो जाएगी, अकाउंटिंग सीख लेंगे, कहीं अकाउंटिंग कर लेंगे।

7 या ₹8000 स्टाइफंड का मिलता है

12 क्लास के बाद मेरे पास ऑप्शन था की क्या करें तो किसी ने कहा एमबीए भी कर सकते हैं। सी ए भी कर सकते है। बट अगर बीबीए या एमबीए तरफ जाएंगे, फिर वही पैसा सीए मे  बोले सस्ता है, बहुत टफ है, लेकिन सस्ता है मगर तरफ से डर नहीं लगता है साहिब पैसे से लगता है तो टफ वाली चीज़ हम कर लेंगे। तो सी ए मैंने पहले एग्जाम दिया तो मेरा फर्स्ट एग्जाम था। सीपीटी का जब हुआ था पहले एग्जाम था ऐट ऑल इंडिया थर्टी सेकंड रैंक और दैट टू विदाउट कोचिंग एंड ऑल। उसके बाद फिर नेक्स्ट लेवल पे गया नेक्स्ट लेवल पे गया तो उस समय सीए की ट्रेनिंग के दौरान मिलता है ₹1000 का उस समय ₹1000 मिलता था। अभी कितना मिलता है? मुझे पता नहीं और 1000 भी कोई देता था, कोई नहीं देता तो नहीं। 1000 बहुत टफ है। मतलब ऑफिस आने जाने में लग जाता तो किसी ने कहा और बॉम्बे में अगर जाओगे ना 7 या ₹8000 स्टाइफंड का मिलता है।

उस समय मेरे को ऐसा लग रहा है खजाना हाथ लग गया। ₹7000 का स्टाइफंड ? मैं जाऊंगा तो घर को झूट बोल के की भैया मैं तो जा रहा हूँ बॉम्बे और झूठ बोल के बैकपैक करके ₹3000 लके  बॉम्बे चला गया, घरवालों को बोला की वहाँ पे हॉस्टल मिल गया है, वहाँ पे जॉब मिल गई है की भैया है, उनके यहाँ रह लेंगे। घरवालों ने कहा ठीक है, कोई साथ लगा नहीं की चलो हम साथ चलेंगे, बॉम्बे देख के आयेंगे किसी के पास। टाइम नहीं है ना कोई वैल्यू है की भाई हम चले तो हम गए अकेले बॉम्बे गए वहाँ पे सारी चीज़े देखी और बहुत स्ट्रगल कि  2 दिन इसके घर, 3 दिन इसके घर, 5 दिन उसके घर या इंटरव्यू दे रहे हैं। वहाँ इंटरव्यू दे रहे हैं। फाइनली 20, 21 दिन के बाद तो मुझे हॉस्टल मिला था। 28 दिन के आसपास मेरे जॉब का सेलेक्शन हुआ था।

महाजन कंपनी में लगा वहा पे मुझे पहली बार पता चला। वो एक मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म थी VAT का काम नहीं होता। ऑडिट नहीं होती वहाँ पे सिंपल रिस्क, कन्सल्टन्सी, रिस्क ऑडिट बनाना, मैनेजमेंट कन्सल्टिंग और मैंने पहली बार देखा कि इस तरह के बिज़नेस में काम होता है और इतने बड़े बड़े समय पहली बार जीवन में Reymond’s के प्लांट में गया था थाने मे।  जितना बड़ा हो प्लान था उतना बड़ा तो मेरा मोहल्ला नहीं था, जहा पे में रहता था। मैंने इतने बड़े बिज़नेस भी होते हैं। इतनी बड़ी फैक्टरी होती है। इतने लोग एक साथ काम भी करते हैं तो माइंडसेट एकदम सी वहाँ से शिफ्ट हुआ। फिर वहाँ से बातचीत में आज मैंने ये किताब पढ़ी। वो किताब पढ़ी। इस किताब में यह लिखा था तो वहाँ से बुक्स के प्रति  पैशन बचपन से था, लेकिन जो मेन फैशन बिज़नेस बुक्स का था वो वहाँ से लेके आया की अच्छा है। धीरूभाई अंबानी  की कहानी है तू कहानी पढ़ के वहाँ से बिज़नेस के प्रति interest जगह।

भैया ड्रीम कम ट्रू

वहाँ पे एक 2 साल रखे बहुत बढ़िया काम किया वहाँ पे जो कितना लक्ज़री, जो पहली बार मिलती है। साइकल पे घूम रहा था। मैं कॉलेज के फर्स्ट ईयर तक साइकल पे गया था, बसों में लटक लटक के जाते थे वो छह जनों की ऑटोमे और 16 जन है जो ड्राइवर के पास बैठकर जाते है ना वैसे हम जाते थे बचपन में ₹2 की कुल्फी के लिए हम स्ट्रगल कर रहे हैं और ₹10 की कचोरी के लिए चार दोस्त लड़रहे  है। तू पैसे देगा, तू पैसा देगा, वैसे निकले और सीधे कन्सल्टिंग में सीधे फ्लाइट में फाइव स्टार होटेल में रुक रहे तो ऐसा लगा भैया ड्रीम कम ट्रू अब ऐसे टाइम पे मुझे टेक्निकली सेटल हो जाना चाहिए था की यार अच्छे पैसे मिलेंगे और पूरी सुविधा है। यहीं सेटल हो जाता है।

लेकिन जैसे सीए बना, पहला थॉट दिमाग में आया की नहीं यार अपन जो साइकल चलाई हो तो जयपुर में चलाइये। और अब यहाँ Mercedes बि चलालेंगे तो जंगल में मोर नाचा किसने देखा और जो बने यहाँ सीखा है वो जयपुर में किसी को तो आता ही नहीं, अपन चलते हैं और वहाँ सिखाते है  हैं तो जब मैं वहाँ गए तो ये शायद सही डिसिज़न ता या गलत डिसिशन था आगे आपको पता पड़ेगा जब मैं गया मेरी उम्र 21 साल 10 महीने की उम्र में मेरा सीए क्लियर हो गया था, अब इमेजिन कीजिये, एक लड़का टीशर्ट पहन रखी है। जीन्स पहन रखी है। थोड़ी सी फटी हुई हैं और हाथ में बाइक पे आया  है और एक बिजनेसमैन को कह रहा मैं आपको कन्सिडरिंग करता हूँ कि देखिये आपका बिज़नेस कैसे आगे बढ़ेगा।

सीए की प्रैक्टिस चालू की

तो उसके बाद फिर मैंने सीए की प्रैक्टिस चालू की। अभी क्लाइंट मेरे पास एक छोटा व्यापारी आता है मेरी इनकम टैक्स कि रिटर्न बरबरदो मैं मेरे स्टाफ को कहा सुनो मेरे पार्टनर आगया भाई तू रिटर्न भर बात कर रहा हूँ और बताओ सर कितने एम्प्लोयी है, कैसे माल  लेते हो, कैसे माल बेचते हो, कितना मार्जिन है, क्या दिक्कत आ रही है, परचेस कैसे करते हो, मार्केट कैसे करते हो? वेबसाइट पे क्या है? तो जब ये सारी चीजें पता करें तो मुझे अंदर की बातें पता पड़ी ।

मई उनसे कहा अच्छा मैं आपकी फैक्टरी आता हूँ एक बार मैं एक बार आप के गोदाम आके देखता हूँ, आपकी दुकान में दो घंटा बैठता हूँ तो वहाँ पे जाके मुझे एग्ज़ैक्ट्ली पता पड़ा कि छोटे व्यापारी के भैया प्रॉब्लम क्या है? मैं पूछता हूँ यार मार्केटिंग कैसे होती है उसने कहा  अगर मार्केटिंग हो क्या होती है? हमको करने की जरूरत क्या है? दुकान खोल के बैठ जाते हैं जो आ जाता है ले जाता है । इसमें क्या मार्केटिंग, में चार लोगों को जानता हूँ। मतलब जो मार्केटिंग तो जानते ही नहीं है और मार्केटिंग क्या होती है और कैसे होती है वो तुम्हें कॉर्पोरेट मैं करके आया मार्केटिंग तो इतनी खतरनाक चीज़ है तीन मस्त चीज़ है, ऐसा होता है तो कर ही नहीं रहे, अच्छा एक काम करो वेबसाइट है क्या, अच्छा वो क्या होती है सोशल मीडिया उसमे तो है ही नहीं   एम्प्लोयी मैनेजमेंट? तो मैंने देखा यार ये छोटा व्यापारी सुबह से 12-14 घंटे लगा हुआ है। साल में कहता है की मैंने यार लाख रुपए की बचत हुई है।

फ्री में कंसल्ट करना चालू किया की

₹2,00,000 महीने की बचत और अपने हेल्थ से परेशान हूँ। मेरे पास ऐसे ऐसे लोग आते थे जो कहते बच्चा कौन सी क्लास में है पता नहीं होगा। बताइए की मेरे बच्चों को मैंने ऐसे बड़ा होते नहीं देखा? मैंने ऐसे बड़ा होते देखा मैं बच्चो का संडे की पापा हु क्योंकि जब मैं सुबह उठता हूँ तो बच्चे स्कूल और रात को वापस आता हूँ तो बच्चे सो गए होते तो बच्चे से मिलता है संडे को तो उसमें मेरी फैमिली लाइफ शून्य, मैं मेरे दोस्तों के साथ घूम नहीं पता। मैं क्रिकेट का शौक था, छूट गया। गाने का शौक था, छूट गया। व्यापारी तो परेशान है यार इसके सारे पैशन छूट गए।

फैमिली छूट गई ये हेल्थ को ध्यान नहीं दे रहा। ये 14 से 16 घंटे एक स्ट्रगल में लगा हुआ है और रिज़ल्ट इतना सा मिलता है और बड़े बिज़नेस मैन क्या क्या कर रहे हैं इसको बेसिक चीज़े नहीं पता। मैंने बेसिक चीज़े उनको बताएंगे तो हम मैंने फ्री में कंसल्ट करना चालू किया की  मैं कोई पैसे नहीं लिया  बस मैं जो बताहूँगा आप करते जाओ और जब किया हो तो कहीं होंको उनको रिज़ल्ट मिला। कई 2 घंटे में ऑफिस या  4 घंटे ऑफिस जाते हैं, हमारा काम हो जाता है, कई लोग कहते हैं हमारा बिज़नेस डबल हो गया हो गया। 

तुम्हारी प्रॉब्लम बताऊँगा मैं सॉल्यूशन बताऊँगा

किसी का ट्रिपल हो गया, कोई फैमिली को टाइम देने लग जाए तो मुझे लगा ये जो मैं काम कर रहा हूँ ना की वो भले का काम कर रहा हूँ, इसको आगे बढ़ाते हैं और मुझे मज़ा आने लग गया इस चीज़ में। लेकिन अभी तक पैसे नहीं आ रहे थे, सिर्फ मज़ा ही आ रहा था। पैसे नहीं आ रहे थे। फिर जब CA बना थोड़ा चार 5 साल हो गए, लोग जानने लग गए लोगों को सफलता मिली हो गए। जब मैंने इफेक्टिव लिखा कि अब मैं कंसल्टेंट और हमें पैसे चार्ज करूँगा, उस समय आसपास दौर था। सुपर 30 मूवी आयी थी। जो मूवी आयी तो बात चली गई। आनंद कुमार करके एक व्यक्ति है जो 30 बनने सिलैक्ट करता है और उनको बताता हूँ तो मैंने कहा क्यों ना बन ऐसा करे की मेरे को इनसे एक बंदो से मीटिंग करके भी यही कह रहा है की मार्केटिंग में ऐसे ऐसे करो, ये गलत है। फिर इनसे मिलकर भी यही कहना।

तुम 30 आदमी से बात एक ही करनी है तो तीसरे को एक साथ बैठाकर नहीं करते क्या? तो मैंने जीतने भी क्लाइंट है, सब को एक कमरे में बुलाया सुनो अपन क्या करते आप मेरे से हैं ना मुझे फीस बड़ी मत दो, छोटी सी फीस दे लेकिन मेरे को भी क्या है की 50,000 हज़ार एक  आदमी से लेने की बजाय 5000 में 20 आदमी से लूँगा, मेरे लिए भी ठीक है और 20 आदमी की वेटिंग भी नहीं, तो मैंने कहा अब मैं स्टेज पे खड़ा रहूंगा। मैं तुम्हारी प्रॉब्लम बताऊँगा मैं सॉल्यूशन बताऊँगा करूँगा काम तुम अपने आप सब कर लें हटकोगे तो पूछ लेना , सो मैं कंसल्टेंट से कोचिंग की भूमिका में आ गया।

ऐसा नोर्मल्ली होता जो कंसल्टेंट होते हैं, बहुत हाई पैकेज पे होते हैं, 50,000 चार्ज कर रहा था। मैं 5,00,000 भी चार्ज कर लेता, लेकिन मेरे को नॉलेज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचानी थी तो कोचिंग वाले फॉर्मेट में आना पड़ा तो मोमेंट आइ तो कोचिंग सुपर थर्टी फर्स्ट चालू हुआ। पहला 32 साल खत्म होते ही अगला बैच बन गया 40 का उसके खत्म होने से अगला बैच बन गया 50 का और उसका बैच खत्म होने से पहले 100 का बैच बनता। उससे पहले करुणा तो जब करुणा गया तो सब बंद हो गया। मैंने कहा कोई नहीं 10,15 दिन की बात है, निकल जाएंगे और वो एक महीने में बदल गया। पहली लहर निकल गयी। चलो अब ठीक है, दूसरी अब ठीक है, दूसरी ओर निकल गई, तीसरी की बातें होने लग गयी। मैंने कहा आपने तो भैया चक्कर है।

इसी काम को ऑफलाइन कर रहे हैं

इससे इनकम बंद हैं, कैसे करेंगे? फिर किसी ने कहा एक काम करो, इसी काम को ऑफलाइन कर रहे हैं। मैंने कहाँ मुझे ऑनलाइन में तो कुछ भी नहीं आता ना वो तो मुझे वेबसाइट आइडा ता न मुझे ज़ूम का आइडिया, मैंने कहा यार मैं तो नहीं करूँगा। लेकिन फिर एक दम से ही किसी ने कहा कि यार चैरिटी का इवेंट कर रहे थे कि जो सुपर 30 कुछ लोग थे उनके फ़ोन आया। मेरा ऐसा प्रॉब्लम थी, मैं एम्प्लोयी निकाल दिया। मई ने कहा मत निकालना उसने कहा मे निकलने वाला था, आपने कह दिया तीन आदमी की जॉब बच गया की दूसरे का फ़ोन आया मैंने सॉल्व किया, तीसरे का है मैंने सॉल्व किया। मैंने कहा तीन फ़ोन 11 लोगों की जान बचा चुका हूँ, यही गलती कर रहे हैं शायद कुछ करे तो मैंने Zoom किसी को बोला की यार मेरे को एक Zoom सेट अप करके दो और फ्री Zoom जो होता था 1 घंटे का। मैंने एक सेशन किया 12:00 बजे का मैंने टाइम दिया था और घर पे बैठ के मैं क्लास ले रहा था 12:01 मैं दोस्त का फ़ोन आया, मेरी एंट्री नहीं हो रही, मैंने कहा क्या बात हो गयी पता चला हाउसफुल था।

12:01 तो सो बन्दों की क्लास ली हर बंदे का ये था की हम एम्प्लॉई निकालने की सोच रहे थे, बिज़नेस बंद करने की सोच रहे थे, टूट गए थे, हार गए थे और उसे गड्ढे से कॉन्फिडेन्स मिला है तो? सर्विसेज बिज़नेस एस आर एक्साइटिंग ओनली इन द इनिशियल स्टेज स्टिल यू गेट योर फर्स्ट हे डू यू वॉन्ट सेम टू ऑफ योर टाइम ऑन ए डेली बेसिस इफ यू डान्स रिसायंस ये सोच रहे थे बिज़नेस बंद करने की सोच रहे थे, टूट गए थे, हार गए थे और उसे एक गड्ढे से कॉन्फिडेन्स मिला है। तो फिर मैंने कहा कि अगला करते हैं 300 आदमियों का किया वो भी हाउसफुल था और उस समय मैंने पहले दो तीन फ्री किये, फिर बाद में मैंने ₹100 ₹200 ₹300 लेना चालू किया और जो पैसे मिलते तो सब में कोरोना में दान कर देता था की ठीक है? कोरोना में भी कुछ के मिशन चल रहा है या अन्य में दो 2100 आधे दो 1100 आधे 100% चैरिटी की।

धीरे धीरे corona की लहर

फिर मैंने कहा धीरे धीरे corona की लहर बाहर आई। मैंने कहा अब फिजिकल इवेंट में कोई कम्फर्टेबल नहीं है। होटल में नहीं आएगा, आप कोई बात नहीं होगी, सो देन वी टेक इट टु ऑनलाइन कोर्स तो किसी से हेल्प ली, छोटा कोर्स बनाया फिर बड़ा कोर्स बनाया तो मंथ्ली हमारे पास उस समय 150 से 200 लोग आते थे, पर बुलाना भी बहुत बड़ी बात थी। मतलब ऐड की शूटिंग में करता था। फिर वो हेड के कमेंट का जवाब मैं देता था। फिर उसके बाद जो लोगों के फ़ोन आते थे, मैं बात करता था फेसबुक पे। वॉट्सऐप पर मैं जोड़ता था, एक एक बंदे की सो प्रॉब्लम सॉल्व करता था, सब पे करता था और 150, 200 लोग थे

जर्नी ऐसी चली आपका प्यार मिला कई लोगों ने कोरोना ने मे अच्छा बिज़नेस किया कहियोंका नीचे चला गया। मेरे कोरोना के बाद चालू हुआ था और वो 150 आदमी जो थे वो आज की डेट में 11,000 आदमी जो व्यक्ति ₹2 के लिए परेशान था। 10, 20,000 ड्रीम जॉब थी। आज मेरे पास 80 आदमियों से 80 से ज्यादा आदमी का स्टाफ है और वो हमने रोक रखा है। अगले 3 साल में 200 से 250 आदमियों का स्टाफ हो जायेगा। हमारे पास टोटल मतलब जितनी मेरी ड्रीम इनकम थी । इतने पैसे आ जाये तो मैं हो जाओ उतना शायद हम रेट दे देते होंगे। स्टॉक मार्केट में अगर मैं बात करता हूँ हमारी कंपनी की वैल्यूएशन की प्रॉफिट डिस्कस करने ब्रैड नहीं करना चाहता। मगर आज की डेट में हम लिस्ट होते है तो मल्टी करोड़ कंपनी

भैया एवरीथिंग इस नॉलेज

लोग मुझसे पूछते हैं सर आपका यूट्यूब चैनल है, बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है। आपके तीन मिलियन 3.5 मिलियन हमारे देखते देखते हुए । मैं कहता हूँ सर मेरे फेसबुक जाके देखूंगा। चार मिलियन है इंस्टाग्राम जगह देखो वहाँ से 700 k है और इकलौता कारण है कि जो भी मैं नॉलेज देखता हूँ सरल होती है और मेरा नॉलेज को लेकर कही और चलते पहला। ज्ञान वो होना चाहिए जो सरल आपने आज मेरी बात सुनी और इसे पदके अगर आप अप्लाई कर सकते हो तो ज्ञान है, बाकी सब नो वैल्यू और दूसरी चीज़ ज्ञान अफोर्डेबल होना चाहिए और मैं जीवन में हर चीज़ कह रहा हूँ की मुझे अगर किसी भी चीज़ से मैं सफल हूँ, सफलता जो भी हो तो मैं कहता हूँ ये सब नॉलेज के फीचर्स ये चाणक्य ने भी कहा है।

भैया एवरीथिंग इस नॉलेज आई आपके पास किसी भी आदमी के पास कितना भी पैसा हो या कोई कितना भी सुंदर हो या राजा हो या धनवान, जानिए व्यक्ति के सामने सब झुक जाते हैं और मैंने देखा है की बचपन में जब मुझे कोई घर में प्रॉब्लम आ रही है, रिस्पेक्ट मोहल्ले में कहीं जा रहा हूँ तो बाकी लोग। चाय पी ले तू बता जो गोदाम खा ले तो ली गाजर का हलवा बना दे तू बस मेरे बेटे के साथ बैठ के थोड़ा पढ़ लिया कर ये मेरा बेटा कमजोर है इसके साथ बैठ के पढ़ लिया कर इसके साथ रहकर इसका होमवर्क करा दिया। अगर मेरी नॉलेज के चक्कर में हर जगह रिस्पेक्ट थी, स्कूल में भी मैं मस्ती करता था तो टीचर डांटते कम थे। मैं हर चीज़ में मुझे प्रायोरिटी मिलती थी तो वो सब चीज़ क्या थी? एक ही चीज़ नॉलेज नॉलेज नॉलेज आप बिज़नेस किस को करना चाहिए? मेरा ऐसा मानना है। बिज़नेस को करना चाहिए क्योंकि इंडिया की जो इकॉनमी जीस तरह से बढ़ रही है उसमें हर व्यक्ति को जब बिज़नेस कर लो आप चाहते हो की मैं जितनी मेहनत करुं उतना रिज़ल्ट मिले हैं। उससे ज्यादा मिले तो वो आपको बिज़नेस नहीं मिल पाता है।

माइक्रोसॉफ्ट नहीं बना पाओगे, कोई बात नहीं सत्या नडेला बन सकते हैं

पहली बात आप बोला की कही हम करना ही नहीं चाहते, हम तो जॉब करना ही पसंद करते हैं। आपका अगर अंदर से तो जॉब ही करूँगा तो जॉब के अंदर आप बनसकते है intrepruneur मतलब आप जॉब में ऐसे काम करो की ये कंपनी चाहे मैंने स्टार्ट नहीं किया है, इस कंपनी में नाम मेरा नहीं, पर इस कंपनी में ये डिपार्ट्मेन्ट मेरा ये जो सिस्टम मेरे अंदर है, जीतने लोग मेरे अंदर है या जो थिस कंपनी ने ओवरऑल टारगेट का जो मुझे जिम्मा लिया है ये मेरा ओनरशिप लेके ही काम करो। कैन यू डेफिनेटली मतलब? आप माइक्रोसॉफ्ट नहीं बना पाओगे, कोई बात नहीं सत्या नडेला बन सकते हैं। गूगल आपसे ना बने, आप सुन्दर पीछै जरूर बन सकते हैं चाहे बिज़नेस करे तो कौन सी इंडस्ट्री में करें? मैं आपको यहाँ से जो भी इंडस्ट्री बताओ गलत बताऊँगा और जो भी कोई भी आपको बताएगा वो सब गलत बताएंगे होगा। इंडस्ट्री वो सही होती है जिसमे आपकाइंट्रेस्ट और जिसकी आप एक्स्पर्ट सपोज़ मैं कहता हूँ आज की डेट में AI बहुत ग्रोथ होती है।

इंडस्ट्री में आपका इंटरेस्ट नाजी है मैंगो इंडस्ट्री में है तो आर्टिस्टिक आदमी है, तो कुछ क्रिएटिव करना चाहते हो, आप तो स्पोर्ट्स में कुछ करना चाहते हो तो करना स्पोर्ट्स में जाते, जो आपको काम आती उसमें काम करो, बहुत आसान है 20 साल की उम्र में, प्रेशर मत डालो 17,18,19,20 साल में और हम क्या करे? हमारी जिंदगी खत्म हो गयी। वैसे तुम्हारी जिंदगी चालू हुई। 2o are फॉर learning ली 30 आर फॉर doing 40 सर फॉर बिल्डिंग 20 साल से 30 साल तक तुम कोई प्रेशर नहीं है, कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है? तुम बस सीखो का फोकस किया है कि तुमने यह इंडस्ट्र, में मन किया, काम किया छह महीने में या तो ज्यादा मन करेगा क्या बोलोगे? बेकार है छोड़ दूसरी 20 साल से 22,30 साल तक तीन 4 साल तो अलग अलग पांच छह अलग अलग इंडस्ट्री कोवताप करे ।

अच्छा या तो इंटरेस्ट बढ़ जाएगा या कम होगा तो छोड़ देना बढ़ेगा तो उसमें आगे बढ़ जाना तो दो 3 साल काम करके तुम्हें पता पड़ जाएगा की अच्छा यह इंडस्ट्री समझ में आती है। फिर उस इंडस्ट्री के अंदर उसके तीन चार कंपनियों में काम करोगे। तुम्हें पता चल जाएगा। ये वाली कंपनी से ही काम करती है। ऐसा काम करती है और फिर तुम्हें अपने काम का आइडिया लग जाएगा। तुम अगर 28,30 तक न्यूक्लियर हो गया ना कि मुझे यह इंडस्ट्री में ये वाला समझ में आता है और तब तक तुम्हारे कनेक्शन बन चूके होंगे तुम्हारा बस थोड़ा सा पैसा इकट्ठा हो गया होगा तुमको दुनियादारी समझ में आ गयी थी अच्छा बुरा उसके बाद। 30 से 40 के दौरे हैं। जब अपनी जो सर्वाइवर वाला काम तो दाल रोटी वाली व्यवस्था वो करो घर परिवार को सेटल के बाद से आप बिना एम्पाइअर जो बिल्डर तो जैसे बड़े आदमी का इंटरव्यू लेते हो यार ये तो वो फोर्टिस के बाद से चीजें बड़े ही चालू होती है की एक विल्लनेर भी है तो उसका विल्लनेर का जो गेम बना है ना तो 30,35 के बाद से बनाया 30,35 है। खुद पे बहुत ज़्यादा प्रेशर मत डालो।

कनसिसटेन्सी अगर आप लगे रहो

आज की कहानी के बाद ये रोना तो रोना मत के पैसे नहीं थे। पैसे तो अपने पास भी नहीं थे। जब पेंशन है आपके पास, कनसिसटेन्सी अगर आप लगे रहो गे क्या मुझे ये चीज़ चाहिए तो छह महीने में नहीं आएगी, वो 1 साल में आएगी, 1 साल में नहीं, 2 साल में आएगी, आ जाएंगे। कई लोग हैं यूट्यूब पर बनना है 10 वीडियो बनाई अब चल रहीं अब भी नहीं बनाया भाई साहब यूट्यूब पे लग रहे हो 100 वीडियो तक देखो ये बिज़नेस करने में उतरे हो 1000 दिन तक देखो ही मत लगे रहो रोज़ डिफिकल्टी आएगी रोज़ सॉल्व करो दूसरी बकरों सॉल्व करो आगे बढ़ते रहो ये तुमने अगर गॉड से यूनिवर्स से बड़ी चीज़ मांगी है ना? पहले बड़े बड़े स्ट्रगल लेके तुम को टेस्ट करेंगे टेस्ट में पास हो गया तो आगे बढ़ जाओगे तुम भगवान से बड़ी चीज़ होता हूँ।

बोला मैं नहीं जानती सैलरी चाहिए तो आराम से मिल जाएंगे कोई स्ट्रगल नहीं, कोई मतलब ही नहीं कहीं भी कोई भी दे 12 ₹15,000 लगेंगे सबसे पहला पॉज़िटिव थॉट। कन्फर्मेशन से आएँगे। विज़ुअलाइज़ेशन से आएँगे एक्स्पोज़र से आएँगे अपने एक्स्पोज़र बढ़ाओ भाई जब तुम बैठ के देखते हो टीवी के टीवी पर देखिए अब साउथ की मूवी आई है,पार्टी करने उसकी जगह में सेमनार में जाओ, exibhition देखो आपकी जो किस्मत है ना वो आपके आत मै है क्या देखते हो आप क्या खाते हो, किन लोगों के साथ बैठते हो, कैसे टाइम बिताते हो? ये सब सही है तो आप की ग्रोथ पक्की और आप कह रहे हो अगर दोस्त नहीं है सरकल नहीं है, किताबों को दोस्त बना लो, यूट्यूब चैनल को दोस्त बना लो। अपने आप सब काम हो जायेगा.

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