History of fevicol in Hindi

इस तरह टूथपेस्ट की जगह लोग दुकान पर जाकर कोलगेट मांगते हैं, उसी तरह आज मार्केट में फैविकोल वही जगह बनाई है। भारत की सत्ता पर से अभी से मार्केट का श्रेय रखने वाली ये कंपनी आ चुकी है तो 1,00,000 करोड़ की मार्केट कैप के 7 साल में 4752 करोड़ का रेवेन्यू जनरेट करती है। क्या आपको पता है कि इस कंपनी की कहानी एक से शुरू हुई थी? आइए जानने की कोशिश करते हैं फैविकोल की शुरुआत करने वाली  Balvant Parekh  गुजरात में पैदा हुए थे और बॉम्बे में लॉ पढ़ने के लिए गई थी। लेकिन फिर कुछ वक्त बाद तो गुजरात लौट थे ही भारत छोड़ो आंदोलन कूदगए ।

मुंबई लौटकर अपनी लॉ की पढ़ाई पूराकिया लेकिन उन्हें लगता था कि इस प्रोफेशनल में झूठ बोला। फूड ट्रेडर के ऑफिस में काम करने लगी और यहाँ पर उन्हें कारपेंटर्स की एक प्रॉब्लम समझ में आये। वो समय था जब लकड़ी का फर्नीचर बहुत डिमांड में था लेकिन तब कारपेंटर्स जो ग्लू इस्तेमाल करते थे वो सॉलिड होतीति थी और साथ ही इसे बनाने के लिए ऐनिमल फैट का भी इस्तेमाल किया जाता था।

फैविकोल के पहला प्रॉडक्ट सप्लाई करना शुरू किया

हिसको के साथ काम करना इसलिए भी चैलेंजिंग हो जाता था क्योंकि इससे आने वाली स्मेल भी बहुत स्ट्रांग होती थी और ये स्मेल फर्नीचर बनने के बाद ताक रही थी। इस परेशानी को देखते हुए उन्होंने फैविकोल की शुरुआत की। इसके इनिशियल कस्टमर्स यही कारपेंटर थे । फैविकोल के पहला प्रॉडक्ट सप्लाई करना शुरू किया। लेकिन ये आज के फैविकोल से बिल्कुल अलग था क्योंकि ये कारपेंटर्स पर फोकस करना, ये एक सिंथेटिक रेसिंग तो जिसे बनाने के लिए किसी तरह की ऐनिमल फैट का इस्तेमाल नहीं किया जाता था और इसलिए मार्केट में मौजूद सभी ऑल्टरनेटिव से बेहतर थी इस प्रॉडक्ट को अपनी टारगेट ऑडियंस तक पहुंचानी और उन्हें।

करने के लिए कंपनी ने अपने पैकेजेस पर कंप्यूटर्स के लिए इन्स्ट्रक्शन्स भी लिखे। होने वाली चैम्पियंस क्लब की विश्वास की एक ऐसी प्रजा होती है जहाँ पर कार्पोरेटर्स को मिल प्वांइट किया जाता है और उन्हें नई स्किल सिखाई जाती है। इसके साथ साथ यहाँ पर पहले गोल के प्रोडक्ट्स का भी डेमो किया जाता है और उनके बारे में भी उन्हें एजुकेट किया जाता है। के बीच में बिना किसी मार्केटिंग के पहुंचने में आसानी होगी और दूसरी तरफ इस क्लब से फ़ोन कारपेंटर्स को भी नई स्किल्स सीखने का मौका मिल रहा है।

380 क्लब्स में 40,000 से ज्यादा मेंबर्स है

ऐसे 380 क्लब्स में 40,000 से ज्यादा मेंबर्स है, लेकिन यहाँ सिर्फ कारपेंटर्स के लिए ही प्रॉडक्ट बनाकर वन मंथ नहीं रुके, बल्कि इसके बाद उन्होंने 1900 क्विक और पहली बोर्ड और बाद में मिस्टर फिक्स और एफसी जैसे ब्रैंड्स को भी अपने अंब्रेला के नीचे लिया और स्कूल ऑफ बिज़नेस को पे जो लाइट एक तस्वीर के बैनर तले कर लिया था। अगर हम पेडीलाइट के बिज़नेस को देखेंगे तो? जिया धड़क से आता है, जिसमें फेवीकॉल के अलावा फैविकोल उनके दूसरे प्रॉडक्ट्स भी शामिल है। इसके अलावा वो इंडस्ट्रीज को भी स्पेशल आती है, सिर्फ रीसेंट सप्लाई कर रही है, जिससे उनका 15% हमें नहीं हुआ है औ

वो स्पेशल तरह आके फिक्स और दूसरी चीजें इंडस्ट्रीज को सप्लाई करके कमाते हैं, लेकिन तभी कौन को बड़ा ब्रैंड बनाने के लिए उस समय सबसे ज्यादा जरूरत क्योंकि तब कोई सोशल मीडिया फिर दूसरी तरह के प्लेटफॉर्म्स नहीं हुआ करते थे और न्यूजपेपर्स और टीवी? मैं सिर्फ इस टिक ऐड्स देने से वो अपने कॉंपिटिटर्स के खिलाफ़ खड़े नहीं हो सकते। यहीं पर उनके नीचे इन्नोवेटिव और पड़ी आज का सहारा लेना शुरू कर दिया। आप देखेंगे कि पे भी कॉल की आठ में आपको कभी कोई सेलिब्रिटी या सुपरस्टार नहीं दिखेगा।

लोगों में दो हाथ, दो अलग अलग डायरेक्शंस में रस्सी के बल देश की एक खींच रहे हैं। पहले कौन के पैसे? इस कदर हमारी कल्चर का हिस्सा हो गया है कि पे भी कॉल की टैगलाइन उसमें भी कॉल का हुआ। सूत्रों जैसे ही नहीं डूबेगा, 20 में इस्तेमाल होते हैं। और इसके अलावा सलमान खान की फ़िल्म का फल टूट गई। इसके दाम पर पूरा एक कार आपकी। प्रोडक्ट्स आप ऐसे ही याद कर सकते हैं जिनको इस लेवल पर किसी सोसायटी को पहली ट्रेड किया गया। यहाँ पर हमें पहले भी कॉल किया। आज चार प्रिन्स को डिजाइन करने वाली कंपनी यानी हो विल बी ऐड मास्टर और उसके कैप्टन है।

फैविकोल को एक पैन इंडिया बना दिया

जिन्होंने 80 के दशक में इस तरह की अप्रोच लेकर फैविकोल को एक पैन इंडिया बना दिया। पहली बार टीवी पर ऐड चलायी थी तो उसे डायरेक्ट करने वाले डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के त्रिपोली गुंडा भाई की नौकरी की और जैसी फ़िल्म गई आगे चलकर बनाइए। इसलिए कभी कौल ने हमेशा ही अच्छे टैलेंट के साथ काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी जापान और भारत के रिश्तों की बात करते हुए एक बार फैविकोल का उदाहरण देते हुए कहा था। फैविकोल का मजदूर जोड़े टूटेगा नहीं ऑटो 1019 में भी उन्होंने अपोजिशन के बहन गठबंधन के बारे में टिप्पणी करते हुए फिर से पब्लिकली पहली कॉल का उदाहरण दिया। कौनसे पांच इंडियन मार्केट में राज़ कर रही है?

बल्कि इनके प्रॉडक्ट आज यूएस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे 71 देशों में एक्सपोर्ट किया। बच्चा प्रॉडक्ट बनाने के अलावा कुछ बेहतरीन बिज़नेस डिसिशन्स के लिए बेसिक 1998 में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के प्रॉडक्ट एमसीआई को कई सारी कंपनीस एक्वायर करना चाहती थी और सभी का ट्रस्ट इसमें था, लेकिन पेडीलाइट ने पहला मूव चलकर इसे सबसे पहले। इसके बाद वाटर प्रूफिंग के मार्केट में घुसने के लिए उन्होंने मिस्टर फिक्स इट को खरीद लिया। प्रॉडक्ट ऑलरेडी मार्केट लीडर्स थे। जब एमसीडी को अक्वायर किया गया तब उसके पास अपने सेगमेंट में 60% का मार्केट शेयर का पॉलिसी। आज भी इतने सालों बाद उसने लगातार अपने टॉपिक्स को किलो वेट करते हुए मार्केट में उसी तरह की डोमिनेंस पर आई।

2008 में फैविकोल ने 13 ओवर सी सब्सिडी स्टैब्लिश की थी, जो आज अच्छी सेल सेक्टर रेट कर रही है और इसके अलावा यू एस्ट्रा सी थाईलैंड से कपूर और तबाही जैसे देशों में गेंद कई पैट्रिक प्लांट्स। अपने ओवरसीज ब्रांच को एक्सपाइर कर दें। उन्होंने हाल ही में किचन ऐट ऑफ बांग्लादेश कैसे देशों में भी मेरी फैक्टरी का झूले का फैसला किया है। कही फैक्टरी प्लांट्स को दुनिया भर में फैला कर उन्होंने अब पीछे डिस्ट्रीब्यूशन और सप्लाई चेन की प्रॉब्लम्स को सॉल्व करके पूरी अगर आपको ही परेशानी आ सकती है

रॉ मटेरियल की कॉन्स्टेंट सप्लाई उनके जीवन के अलावा सिंगापुर में अपना 21 और जो सेंटर भी साबित किया है। अगर हम वापस 1 फरवरी को पार्क की स्टोरी बनाते हैं तो गुजरात के। कॉलेज हॉस्पिटल का भी निर्माण करवाया है। इसके अलावा सोसायटी को सर्व करने के लिए उन्होंने दर्शक फाउंडेशन की थी शुरुआत की थी, जो कि एक ऐसा एनजीओ है जो गुजरात की कल्चरल हिस्टरी को स्टडी करने में एक बड़ा रोल अदा कर रहा है। पवन पारिक नहीं आम नगर की साइंस सिटी प्रोजेक्ट में।

2013 में उनकी मौत हुई तब वो से भारत के 45 वें सबसे अमीर आदमी, जिनकी नेटवर्क तब करीब 30% और 36 मिलियन डॉलर्स की कुल मार्केट कैप 117 1,00,000 करोड़ थी ।

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