kalpana Saroj Biography in Hindi

kalpana Saroj Biography in Hindi – मैं कल्पना सरोज आज मैं आपको अपनी कहानी बता हूँ गी कहाँ से मैंने ₹2 से शुरू किया था ₹60 महीना ₹2 रोज़ और आज देखिये मुझे मैं आज 2000 करोड़ की मालकिन हूँ, क्या यकीन आएगा आपको? मैं एक ऐसी लड़की इसको एजुकेशन नहीं मिला। बचपन में शादी कर दी गई। मेरे मामा जी कहते थे की लड़कियों को पढ़ाकर करना क्या है? पढ़कर करेगी क्या चूल्हा चौके के साथ कुछ करना नहीं है? लडकिया तो वैसे भी जहर की पुड़िया होती है।

इस तरह से मेरा बचपन था और बचपन में ही शादी कर दी गई। उम्र के 12 साल में मैं पढ़ना चाहती थी। पढ़ लिखकर आगे बढ़ना चाहती थी। मैं काफी होशियार विद्यार्थी, विद्यार्थी भी थी, मगर नहीं किसी ने मेरी नहीं सुनी और शादी के बाद ससुराल जीस तरह से होनी चाहिए हर लड़की का जीस तरह का सपना होता है कि उसका ससुराल कैसे हो, कोई प्यार करने वाला हो, कोई अपना कहने वाले हों मगर नहीं। वहाँ तो कुछ और ही था। वह इस तरह से बहुओं को मारा पीटा जाता है, गाली गलौज दिया जाता है।

आदत सी हो गई थी कि रोज़ मार खाना

माँ बाप के ऊपर से गाली दी जाती है। अगर मान लो खाना बना लिया। नमक ज्यादा हो गया तो माँ के ऊपर से गली की क्या माने? इसी तरह से खाना बनाना सिखाया है और मारपीट शुरू हो जाती थी तो इस तरह से किसी तरह से छे महीने बीत गए। बस एक आदत सी हो गई थी कि रोज़ मार खाना है, गली खाना है, चाहे काम जितना भी अच्छा कर लो और एक छोटी 12 साल की उम्र की लड़की घर का इतना सारा काम करते हुए भी।

हर दम सिर्फ गाली खा रही हैं, मार खा रही है, ना ढंग का खाना मिल रहा है ना ढंग के कपड़े पहनने को मिल रहे हैं यहाँ तक कि बाल बनाने की भी वहाँ पर ये नहीं थी की मैं बाल बना लूँ। अगर बाल भी बनाने को जाएंगे तो हमारे जेठ जी ये कहते थे की भाई कहाँ नाचने के लिए जाना है क्या? तुम्हे जो बाल बनाने जा रही हो? मतलब तू कितने घटिया हो सकता है आप लोग खुद सोच सकते कितना घटिया हो सकते हैं, आप लोग खुद सोच सकते हैं।

मेरी जिंदगी तो वैसे ही बोझ बन चुकी थी।

इसी तरह से छे महीने बीत गए और मेरे पिताजी मुझे मिलने के लिए आये। जब पिताजी मिलने के लिए आए, बहुत रोना आया मुझे क्योंकि पहली बार किसी अपने को अपने करीब देखा था बाबा भी रोये। उन्होंने देखा कि मेरी बेटी इतनी मतलब चंचल, हंसती, खेलती हुई और आज इसको क्या हो गया? क्यों इस तरह से हो गई और बाबा मुझे वहाँ से कहने लगे कि तुम्हें अभी मेरे साथ चलना होगा, मैं यहाँ तुम्हें एक पल भी नहीं रहने दूंगा और मेरी बाबा मुझे ले गए। कहने लगे कि जो भी हो गया भूल जाओ समझो की एक सपना था जो बुरा सपना था।

मैं तुम्हें फिर से पढ़ाऊंगा तुम्हारा फिर से स्कूल में दाखिला कराऊंगा और बाबा ने वही किया मगर अफसोस? वहाँ के जो लोग थे, जो समाज था वो ताली मारने लगे। कहने लगे की मेरे बाबा सही आदमी नहीं है, जिन्होंने अपनी बेटी को ससुराल से ले आए और मैं तो सही थी ही नहीं। मैं तो बहुत ही बुरी थी कि एक ऐसी लड़की जो ससुराल छोड़कर चली जाती है, क्योंकि हमारे यहाँ की संस्कृति ये कहती है की लड़की डोली में जाएं, आरती में भले ही निकले लेकिन वो इस तरह से वापस नहीं आ सकती। ये परंपरा रही है तो मैं परंपरा के विरुद्ध हूँ।

फिर मैं ने पॉइज़न ले लिए

ऐसे लोगों को लगने लगा और सारे लोग मेरे माँ बाप को ताने मारने लगे। मुझे कोसने लगे और जब मैंने देखा की ये तो बहुत वहाँ तो था ही था लेकिन यहाँ तो इससे भी ज्यादा है। ओके, मैं क्या करूँ? मेरी जिंदगी तो वैसे ही बोझ बन चुकी थी। सब कुछ खत्म हो चुका था। मेरी पढ़ाई खत्म हो चुकी थी। मेरी शादी खत्म हो चुकी थी और आगे पढ़ने के लिए बाबा कहते हैं लेकिन ये भी नामुमकिन नहीं था। तो मैं क्या करूँ? तो फिर मुझे ऐसा लगा कि मुझे मर जाना चाहिए क्योंकि ऐसी ज़िन्दगी मेरी किसी भी काम की नहीं है और फिर मैं ने पॉइज़न ले लिए। पॉइज़न करने के बाद भी डॉक्टर ने कहा कि बच नहीं पाएगी। 24 घंटे में अगर इसको होश आ गया तो के वरना नहीं बच पाएगी।

लेकिन काफी कोशिशों के बाद मैं बच गई। बचने के बाद लोग मिलने के लिए आने लगे। हमारी पुलिस स्टेशन के मेरे बाबा पुलिस हवलदार थे तो वहाँ के पुलिस वाले जिनको हम चाचा कहते थे, मेरे रिश्तेदार जीतने भी लोग मुझे मिलने के लिए आये। वो सब ये कह रहे थे कि ये लड़की ये तू क्या कर रही थी, मालूम भी है, अगर मर गई होती तो लोग क्या कहते हैं? लोग तो यही कहते है ना कि महादेव की बेटी ने।

जरूर ऐसा कोई काम किया होगा जिसकी वजह से ये मर गई? ये जो बात है मेरे दिल की गहराई तक पहुँच गई की ये क्या तरीका हुआ कि लोगों को हमारे दुख दर्द से कोई लेना देना नहीं, हम मरे या जीए उससे कोई लेना देना नहीं तो ठीक है। अगर कुछ करके मरना है तो फिर कुछ करके जीना क्यों नहीं? और उसी दिन मैंने ठान ली की अब मरने की बात में कभी नहीं करूँगी और अब मैं जीकर दिखाऊंगी।

लोअर परेल वहाँ पे मैं काम पे लग गयी

फिर मैंने अपनी कोशिश शुरू की, अपना संघर्ष शुरू किया। मैंने अभी कोशिश है की मुझे कहीं नौकरी मिले गी मैं अपने बलबूते पे जो अपने कदमों पे खड़ी रहूं और मैं एक पुलिस हवलदार की बेटी होने के नाते मैं पुलिस के पास गयी थी। मैं लेडीज पुलिस बनु लेकिन मैं उम्र और मेरा ये जो। कम होने के नाते वो नहीं हुआ।

नर्सिंग में जाना चाहती थी, नर्स का नहीं हुआ। यहाँ तक कि मैंने ये भी सोच लिया की मैं आर्मी जॉइन कर लू ताकि मैं देश के काम आ जाऊं, अपने से नहीं हो पाया, फिर मैं क्या करूँ? कैसे जाऊं? मुझे खेतों में काम नहीं करना था तो फिर मैंने अपनी माँ से कहा कि मुझे मुंबई भेज दो।

हो सकता है कि मैं वहाँ बहुत बड़ी मिल है। कंपनी है कहीं ना कहीं जौन कर लूँगी काम कर लूँगी और बड़ी मुश्किल से मेरी माँ ने मुझे मुंबई भेजा और मुंबई आने के बाद में मैं एक कंपनी में सन मिल कंपाउंड लोअर परेल वहाँ पे मैं काम पे लग गयी कंपनी में वहाँ मैंने ₹2 रोज़ से और ₹60 मैंने से काम स्टार्ट कर दिया, तो दो 3 साल तक मेरे इसी तरह से गए।

50,000 का लोन लिया

मेरे बाबा की नौकरी जाती रही। मेरे बाबा मेरे पास आ गए। और उसके बाद मेरी बहन बहुत बीमार हो गई और फिर मुझे पैसों की अहमियत का पता चला कि पैसे अगर नहीं हो तो हमारे अपने हमारे सामने दम तोड़ देते हैं और हम उनको बचा भी नहीं पाते और तब फिर मैंने ये सोचा की मुझे पैसे कमाना चाहिए और फिर मैंने देखा कि मैं कहाँ से और कैसे पैसे कमा होंगे तो मुझे कुछ गवर्नमेंट के स्कीम के बारे में पता चला। तो मैंने एक 50,000 का लोन लिया। 50,000 लोन लेकर मैंने अपना बिज़नेस स्टार्ट किया। मैंने बुटीक के लिए लोन लिया था, बुटीक स्टार्ट किया, उसी के साथ फर्निचर स्टार्ट किया लेकिन उसी के साथ मुझे ये पता चला की हमारी बहुत सारे यूथ ऐसे हैं जो उनको गवर्नमेंट सभी को नौकरी नहीं दे सकती।

तो जो मैंने पाया उस सभी को मिले इसलिए मैंने शिक्षित बेरोजगार युवक संगठन बनाएं और उस घटना के द्वारा उन बच्चों लोगों को भी उसी तरह से अपने कदमों पे खड़ा करने की मैंने पूरी कोशिश की और इसी तरह से मेरा बहुत अच्छा नाम होने लगा। क्योंकि बच्चे जो है वो उनकी आवारागर्दी छूट गई या फिर उन माँ बाप के घर के चूल्हे जलने लगे और लोग मेरे लिए काफी अच्छी बात करने लगे। तो लोगों के जो भी मतलब मुसीबतें होती थी या जो भी उनके प्रॉब्लम्स होते थे तो लोग मेरे पास चले जाते थे कि मैडम हमारी ये प्रॉब्लम है सॉल्व करो तो इसी तरह से एक प्लॉट का प्रॉब्लम मेरे पास आया। वो प्लॉट मैंने क्लिअर की किया और इसी तरह से मैं बिल्डर बन गई।

मैंने रिवॉल्वर ले लिया

लेकिन बिल्डर बनते हुए भी पुरुष प्रधान देश में मेरा बिल्डर बनना एक तोमय बुद्धिस्ट दलित हो और ऊपर से मैं लेडीज हूँ। कि एक दलित महिला के बिल्डर बन जाए तो मेरे नाम की सुपारी दी गई। मुझे मारने की कोशिश तक के कर दी गई लेकिन मैं उसी वक्त वहाँ के पुलिस कमिश्नर के पास गई। उनको मैंने सारी हकीकत बताई कि इस तरह की बात मेरे कान पर आई। पुलिस ने उन लोगों को पकड़ा और फिर पुलिस ने कहा कि भाई तुम एक काम कर लो तुम्हारे इसलिए सेक्युरिटी ले लो। मैंने कहा नहीं सेक्युरिटी नहीं चाहिए, मुझे अगर देना है तो मुझे लाइसेंस दे दीजिएगा ताकि मैं अपनी रक्षा खुद करूँगी।

और मैंने रिवॉल्वर ले लिया तो इस तरह से मेरी जर्नी शुरू रही। मैं बिल्डर बनी और फिर मैं शुगर फैक्टरी के डायरेक्टर बनीं और इसी तरह से कम लिमिटेड के कुछ वर्कर्स मेरे पास में आए क्योंकि कम्युनिटीज़ हमारे देश की बहुत बड़ी ऐसी कंपनी है। जिसकी वजह से ऐसी का ऐट तैयार हुआ। सुप्रीम कोर्ट की बेबी है वो सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार वर्कर्स को मालिक बनाया और मालिक को बाजू में कर दिया तो उस कंपनी को बचाने के लिए मैंने काफी कुछ मेहनत की क्योंकि मैंने देखा था कि बेरोजगारी अगर होती है तो भूख और प्यास से किस तरह से इंसान तड़प कर मरता है, क्योंकि मेरी बहन को मैंने तड़पते हुए मरते हुए देखा था। तो वो नहीं, वर्करों के हित के लिए मैंने कमाने ट्यूब में मैं आई और मैंने काम किया।

जिसने ₹2 रोज़ से काम स्टार्ट किया था,

2000 में मैं आई थी 2000 से लेकर 2006 तक कंटिन्यू पोर्ट में होते रहे और 21 मार्च 2006 में पोर्ट ने कंपनी मुझे चलाने के लिए दे दिया। अब उसके बाद कोर्ट ने कंडीशन दी थी कि 2011 में आपको सीखा से बाहर निकलना है और हम बिल्कुल 2011 में सिक्का से बाहर निकल गए तो मैं। एक ऐसी लड़की जहाँ से चली थी, जिसके गांव में रास्ते तक नहीं थे। आज मुंबई शहर में उसके नाम से उसकी कंपनी के नाम से दो रोड है। रामजीभाई कमाई।

अरे कैसी लड़की? जिसके पास में 60 पैसे नहीं हुआ करते थे तो वो कुर्ला से लेके चेंबूर तक पैदल चला करती थी, क्योंकि बस के लिए 60 पैसे नहीं आज वो लग्जरी गाड़ियों में घूम रही है। आज ऐसी लड़की जिसके पास में रहने के लिए घर नहीं था, लोगों के घर में रही हूँ। मैं गुजराती फैमिली के घर में रही हूँ लेकिन मैं बिल्डर बनके आज मैं घर बेच रही हूँ। आज। जिसने ₹2 रोज़ से काम स्टार्ट किया था, लेकिन आज 2000 करोड़ कंपनी की मालिक हूँ।

जो जीरो थी आज वो ज़ीरो ऐसे बन गया है कि किसी भी आंकड़े लगा दो।

इस तरह से अगर इंसान चाहे तो बहुत कुछ कर सकता है। मेरे टाइम पे करने के लिए कुछ भी नहीं था, यूं समझ लीजिए ना की रात के ढेर में धू तो चिंगारी भी ना मिले। इस तरह की मेरी अपनी पोज़ीशन थी। उसके बावजूद भी मैंने जो भी अपने जीने का तरीका ढूंढा। और मैं आज इस मुकाम तक पहुंची तो आपके लिए बहुत कुछ है।

करने के लिए बहुत कुछ है। गोवरमेंट के बहुत सारे बड़े बड़े स्कीम है। हर जगह से आपको सपोर्ट है। जहाँ से भी आप चलो वहाँ आप के लिए सपोर्ट है तो मुझे ऐसा लगता है की आप बहुत कुछ कर सकते हैं। एक ऐसे नारी लड़की क्योंकि जो एजुकेशन मैंने लिया है नाइन्थ तक का। ऐसी लड़की आज आईएम के गवर्नर्स बन सकती है आज ऐसी लड़की उसको बिज़नेस किसे कहते हैं, पता ही नहीं था।

उन्हों नौकरी की तलाश में खुद की नौकरी के लिए भटक रही थी। आज वो हजारों लोगों को नौकरी दे रही है तो बच्चो को मैं आज के जो यूथ है मैं उनको ये कहना चाहूंगी की आपके हाथ आप देश का भविष्य हो और आप चाहो तो बहुत कुछ कर सकते हो। आपके हाथ में तो बहुत कुछ है करने के लिए जरूरत है सिर्फ एक कदम उठाने की जरूरत है हिम्मत की, मेहनत की ईमानदारी और एक जुनून की। जब ये जुनून तुम्हारे अंदर आ जाएगा ना कि तुम्हें कुछ करना है तो यकीनन तुम जरूर कुछ करके दिखा होगे। जीस तरह से एक कल्पना सरोज करके सकती है जिसके पास जो जीरो थी आज वो ज़ीरो ऐसे बन गया है कि किसी भी आंकड़े लगा दो।


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