Mashi Biryani Success story in Hindi

Mashi Biryani हमेशा एक जुनून एक हमेशा एक पल थी, मेरा भी एक brand होता, काश मैं भी एक अपना एक brand बनाता हम लोग 12,16 घंटा मेहनत करते है। हम लोग 100 किलोमीटर स्कूटी चलाते हैं। भैया भगवान आपके लिए चौथा मौसम कहीं से नहीं लाएंगे की चौथा मौसम लेकरके आए जहाँ पे ना गर्मी नाजारा, ना बरसात ना ठंडा आपको एक्स्क्यूस नहीं देना है। मैं आज आप लोगों को एक बात बताना चाहता हूँ कि मुझे इस चीज़ का ज़रा सा भी पछतावा नहीं है कि मैंने 50,00,000 का जॉब क्यों छोड़ा? क्यों रिस्क लिया? मैंने ज़रा भी पछतावा नहीं की। आज अगर मैं वो रिस्क ना लेता तो आज मैं शायद इस मुकाम पर नहीं पहुंचता। ना मैं 50,00,000 का जॉब छोड़ता और ना मैं आज इतना बड़ा brand खड़ा कर पाता।

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कभी किसी इन्वेस्टर का, किसी का सपोर्ट नहीं लिया

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम मुदस्सर रिजवी है और लोग मुझे के Mashi के नाम से जानते हैं Mashi बिरयानी के फाउंडर हू । और मुझे आज बताते हुए खुशी है कि आज हम पूरे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बिरयानी बेचने वाले रेस्टुरेंट में से एक है। आज हम बिरयानी को सेल आउट करके करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं और सेवन डिजिट में सरकार को टैक्स पे कर रहा है। दोस्तों, हमने कभी किसी इन्वेस्टर का, किसी का सपोर्ट नहीं लिया। जो भी किया, अपने बलबूते से किया, खुद किया, कभी किसी का सपोर्ट नहीं लिया। लोग देश विदेश से बिरयानी खाने के लिए आते हैं और हम अपने बिरयानी को भारत के अलावा बाहर के भी मुल्क में मुख्य शहरों में भिजवाते हैं। बहुत सारे लोग यहाँ से दुबई, मस्कट, कतर, यूएस, कनाडा, लेकरके जाते हैं और हम अपने बिरयानी को देश विदेश के हर कोने कोने तक पहुंचा रहे हैं।

पढ़ाई में कभी मन लगता नहीं था

स्टार्ट करते है अपनी जर्नी के बारे में और चलते हैं ठीक 15 से 18 साल पहले की लाइफ में कि मैंने कैसे चीजों को स्टार्ट किया? दोस्तों मेरी ऐकैडैमि क्वालिफिकेशन लखनऊ से हुई और मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ और पढ़ाई में कभी मन लगता नहीं था स्कूल में हमेशा पीछे बैठता था। कि बहुत मुश्किल से मैंने अपने एकैडमी क्वालिफिकेशन अपना 10,12th और ग्रैजुएशन को क्लियर किया। लेकिन हाँ, एक चीज़ मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं शुरू से एक ब्रैंड बनाने का जो मेरा एक सपना था कि ब्रैंड के साथ में रहना, उठना, बैठना, खाना बनाना। पुमा, एडीडास, केएफसी अब वे देखकर के मुझे ऐसा लगता था कि काश मैं भी एक अपना ब्रैंड डेवलप करूँ। हमेशा एक जुनून ता काश मैं भी एक अपना एक बैंड बनाता और बस इसी सपने को सच करने की तलाश में मैं लखनऊ से बॉम्बे चला गया जब मैं गया तो बस मैं यही सोचता था की मेरा अपना खुद का ब्रैंड कैसा हो।

लेकिन सपना बहुत बड़ा था की एक बैंड डेवलप करना है

मैं बहुत छोटी फैमिली से बिलॉन्ग करता था। पिताजी एक मेडिकल स्टोर चलाते थे और फैमिली का बहुत ज्यादा सपोर्ट नहीं था। लेकिन सपना बहुत बड़ा था की एक बैंड डेवलप करना है। ब्रैंड बनाना है, बैंड के साथ में काम करना है। कैसे कर सकते हैं? इसी सपने को सच करने की तलाश में मैं तो आ गया बॉम्बे और बॉम्बे में आने के बाद मैंने क्या किया की मेरे पास फाइनैंशली मेरी बहुत अच्छी नहीं थी। पिताजी मुझे तीन से ₹4000 महीने का भेजा करते थे जो कि महीने की 25 तारीख तक आते आते खत्म हो जाया करते थे और फिर मैंने क्या किया की मैंने वहाँ पर एक डिजिटल मार्केटिंग एक कंपनी थी वहाँ पे मैंने डेटा एंट्री का एक जॉब जॉइन कर लिया डेटा एंट्री का और मुझे आज भी याद है कि मैं जीस कंपनी में डेटा एंट्री का जॉब कर रहा था।

धीरे धीरे मैंने अपने चीजों को सीखना स्टार्ट कर दिया।

वहाँ पर बहुत सारे अलग अलग विभाग थे, कोई वेब डेवलपर था, कोई प्रोग्रामर था, कोई कोडर था और अलग अलग तरीके से लोग वहाँ पर काम कर रहे थे और जब वहाँ पे लोग काम कर रहे थे तो मेरा पैशन था कि मैं वहाँ पर ऑफिस टाइम में जब मेरा 6:00 बजे ड्यूटी खत्म हो जाती थी तो 6:00 बजे के बाद में रुक जाया करता था और वहाँ पर जो मेरे सीनियर्स थे, उनके साथ में टाइम स्पेंड करता था और उनसे सीखता था की सर, आप मुझे प्लीज़ कुछ coding के बारे में बताये प्रोग्रामिंग के बारे में बताये डेवलपमेंट के बारे में बताएं ऐडवर्ड्स क्या होता है? डिजिटल मार्केटिंग की सारी चीजों को मैं धीरे धीरे वहाँ पर सीख रहा था और जो पैसे मैं कमा रहा था, वहाँ से कुछ साथ ₹8000 कमा रहा था, तो वो ₹8000 में क्या करता था कि वो 8000 से मैंने बांद्रा बोस्टन एक इन्स्टिट्यूट था। वहाँ से मैंने एक कोर्स जॉइन कर लिया डिजिटल मार्केटिंग का और वो अब मैं डिजिटल मार्केटिंग रहा था और डेटा एंट्री का काम एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में काम भी कर रहा था। तो इस तरीके से धीरे धीरे मैंने अपने चीजों को सीखना स्टार्ट कर दिया।

मेरे लिए बहुत प्रॉब्लम का टाइम था।

लेकिन हाँ, मैं दोस्तों बताना चाहता हूँ कि जो मैंने बॉम्बे में जो लाइफ जो मैं गुजर रहा था, मेरे लिए बहुत प्रॉब्लम का टाइम था। लेकिन हाँ ये है की बॉम्बे शहर आपको बहुत कुछ दिखा देता है। बॉम्बे से मैं बहुत कुछ सीख रहा था और फाइनैंशली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। पिताजी जो पैसे भेजते थे वो महीने में खत्म हो जाते थे और फिर मुझे 25 तारीख के बाद मुझे आज भी याद है कि कभी ट्रेन के ऊपर, कभी ट्रेन के बीच में जो सीडी होती थी लोकल ट्रेन में उसके ऊपर चढ़ करके वडा पांव समोसा पांव खा करके गुज़ारा करना पड़ता था। क्योंकि फाइनैंशल कंडीशन हम लोग की बहुत अच्छी नहीं थी और कमा रहा था सीख रहा था और इस तरीके से धीरे धीरे करते करते करते मैं सारे कोर्स कोर्स करके सीख चुका था।वो तो मैं अपने कोर्स में लगा रहा था और मेरे तीन भाई थे, उनके फीस थी, घर का खर्चा था, एक्स्पेन्सिव था और पिताजी बस इतना ही कमा पा रहे थे कि घर में जो।

5 Lkhs में स्टार्ट किया था और धीरे धीरे करते सात सालों में मैं 50 Lkhs तक पहुँच गया था।

और रोज़ी रोटी बहुत मुश्किल से हम लोग की चल रही थी तो फिर पिताजी ने क्या किया कि पिताजी ने एक किसी दोस्त से पैसे ले करके मुझे दुबई भेजने का फैसला किया और मैं 2008 को दुबई चला गया और दुबई आने के बाद मैं बड़ा परेशान था। एक दो हफ्ता कि मैं कैसे जॉब करूँगा, क्या करूँगा? लेकिन प्लस पॉइंट ये था की मेरे वहाँ पर कुछ फ्रेंड थे । जिन्होंने मेरी वहा पे स्टार्टिंग में हेल्प किया और फ्रेंड के हेल्प से मैं एक ऐडवर्टाइजिंग एजेंसी JOIN कीय । एमएनसी कंपनी है, उस कंपनी में मैं वहाँ पर लग गया और इस तरीके से धीरे धीरे मेरी सैलरी का ग्रोथ हो ना वहाँ पर स्टार्ट हुआ। अब मैं वहाँ पर बहुत कुछ अपने सीनियर्स के साथ में सीख भी रहा था और प्रमोशन भी हो रहा था। मैं बहुत खुश था। कि दुबई में मेरे लाइफ धीरे धीरे सेटल हो चुकी है और मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जब मैं वहाँ पे स्टार्ट किया था तो मेरी सैलरी कुछ तीन से 4000 Dhirams था आपको अगर कंपेर करूंतो तो मैंने चार से 5,00,000 में स्टार्ट किया था और धीरे धीरे करते सात सालों में मैं 50,00,000 तक पहुँच गया था।

आपको 500 मिल रहा है तो आप 3000 का काम करके दिखाओ

इस कहानी के माध्यम से मैं आपको एक चीज़ बताना चाहता हूँ कि कोई भी आदमी अगर ₹500 दिहाड़ी मिल रही है, तो वो कोशिश करें 5000 का काम करने के लिए हमारे भारत में क्या होता है कि मिल रहा है? 500, 500 ही करेंगे। वो आपने कभी आगे बढ़ नहीं पाता है। अगर आपको 500 मिल रहा है तो आप कोशिश करें कि आप 5000 का काम करके कंपनी को दिखाइए। मैंने कभी ये नहीं सोचा था। मैं की मुझे बहुत कम सैलरी मिल रही है और मैं कैसे बड़ा काम करूँ? हमारे इंडिया की मेंटैलिटी क्या है की अगर 500 1000 मिल रहा है तो वह 1000 का ही काम करेंगे, ऊपर काम नहीं करेंगे। इस मेंटैलिटी के साथ में इंडिया में लोग जॉब कर रहे हैं तो मैं बताना चाहता हूँ की अगर आपको 500 मिल रहा है तो आप 3000 का काम करके दिखाओ, 8000 का काम करके दिखाओ, ज्यादा काम करके दिखाओ।

बहुत लग्शुरीअस लाइफ दुबई में जी रहा था

अगर आप करोगे तो कंपनी में आपकी एक रेपो बनेगी, एक रेपुटेशन बनेगी और आपका कंपनी में प्रमोशन भी होगा और आप सबकी नजर में आओगे कि यार ये बन्दा बहुत काम करता है। बहुत मेहनती बनता है इस चीज़ का आप लोग ख्याल रखियेगा। दुबई में सारी चीजे सब बिल्कुल सेट थी और मुझे कंपनी ने फ्लैट, गाड़ी और सारी चीजे दे रखी थी और 8, 10 साल काम करते करते धीरे धीरे मैं बहुत वेल इस्टैब्लिश दुबई में हो चुका था। बहुत लग्शुरीअस लाइफ दुबई में जी रहा था। मुझे लग रहा था की मेरा पूरा लाइफ इन्डिपेन्डेन्ट हो गया है और सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा है। तभी अचानक रात में मम्मी का फ़ोन आता है कि पिताजी को हार्ट अटैक आया, फर्स्ट हार्ट अटैक आया है 2016 फेब या मार्च का टाइम था।

पूरा लाइफ मेरी दुबई में सेट हो चुकी है

2016 का का टाइम था अब मैं बड़ा परेशान था कि मैं क्या करूँ क्योंकि मैं पूरा लाइफ मेरी दुबई में सेट हो चुकी है और अब मैं क्या करूँ, कैसे करूँ मुझे? मुझे तो तीन 4 दिन समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं करूँ तो क्या करूँ? अब अगर इंडिया जाता हूँ, घर की जिम्मेदारी थी। और तीन भाई थे उनकी पढ़ाई लिखाई फीस अब मैं दुबई से सब कुछ करना स्टार्ट कर चुका था, अब अगर दुबई से छोड़ता हूँ इंडिया जाता हूँ तो क्या करूँगा? और फादर को फर्स्ट हार्ट अटैक है, वो भी सोच रहा था की अब तबियत उनकी सही नहीं है। क्या करूँ? ऐसे में फिर मैंने डिसाइड किया की मुझे क्विट कर के जाना है। अब ऐसे में मेरे लिए बहुत टफ डिसिशन था इंडिया आ करके सेटल होना या कुछ करना था । लेकिन हाँ, एक चीज़ मेरे माइंड में चल रही थी कि अगर मैं इंडिया जाऊंगा तो जो एक सपना मैंने बनाया था एक ब्रैन डेवलप करने का की एक अपना खुद का ब्रैंड बनाऊंगा तो बस वही एक चीज़ थी जो पॉज़िटिव पॉइंट मुझे देख रहा था। इसके अलावा हिम्मत नहीं कर रही थी कि दुबई का जॉब छोड़ करके जाऊं कैसे जाऊं की बढ़ी परेशानी हैं क्या करें, कैसे करें? अपने हाथों गया लखनऊ अब लखनऊ में आने के बाद 2 दिन तक फादर की तबियत सही नहीं थी तो उनके साथ में रुका, उनको दिखाया, हॉस्पिटल में लेके गया और धीरे धीरे मैं आपको बताना चाहता हूँ कि हर जगह तो पैसे की जरूरत थी।

मेरे फादर हैदराबाद के एक्स्पर्ट बिरयानी के शेफ थे

लेकिन एक प्लस पॉइंट मुझे देख रहा था की मेरे फादर हैदराबाद के एक्स्पर्ट बिरयानी के शेफ थे तो मुझे एक चीज़ समझ में आ गई थी कि मुझे जो भी करना है फूड इंडस्ट्री से ही रिलेटेड करना है तो फादर से मिला बात किया। हालांकि उन्हें अभी एक 2 दिन पहले अटैक आया था, लेकिन अनजियोग्राफी वगैरह हो चुकी थी। तबियत थोड़ा स्टेबल थी तो उनसे बैठ करके बात किया की बताइए की क्या किया जाए? मुझे तो कुछ समझ में भी नहीं आ रहा है कि मैं लखनऊ जैसे शहर मैं क्या करूँ तो उन्होंने बोला कि बेटा मेरे पास जो प्लस पॉइंट है की मैं बनाना जानता हूँ, मेरे फादर हैदराबाद के एक्स्पर्ट थे तो यह एक प्लस पॉइंट था कि फादर जो एक्सपोर्ट शिफ्ट थे उनके इस हुनर को मैं एक ब्रैंड में कन्वर्ट कर सकता था, जो की मेरा एक ख्वाब भी था।

घर के बगल में एक 1000 स्क्वेयर फिट की जमीन ली

क्या किया की हम लोगों ने अपने घर के बगल में एक 1000 स्क्वेयर फिट की जमीन ली और वहाँ पर। बिरयानी बनाना सीखना स्टार्ट कर दिया। लकड़ी लेकरके आए और चावल लेकर के आए पतीला ले करके आये और ठीक घर के बगल में 1000 स्क्वेयर फिट जमीन ले ली थी। अब वहाँ पर फादर की से धीरे धीरे सीखना स्टार्ट किया। अब मैं खुद मैं बताना चाहता हूँ कि मैं खुद मंडी जाता था। सब्जी मंडी और जा करके प्याज को लेकर के आता था लाके कट करता था, क्योंकि बिरयानी में सबसे बड़ा रोल प्याज का होता था। और बड़ी मेहनत कर रहा था और इस तरीके से धीरे धीरे करते करते करते फादर के से मैं बनाना सीख लिया था। बिरयानी को सीखना स्टार्ट कर दिया था और सीख लिया था।इस तरीके से मैंने पूरा बिरयानी बनाना सीख लिया था। बिरयानी सीखने के बाद हम लोग क्या करते थे? हम लोग बिरयानी बनाने के बाद अपने रिलेटिव्स को फ्रेंड्स को ले जा करके बिरयानी देते थे और उनसे एक रिव्यु लेते थे की आप ज़रा बताइये बिरयानी आपको कैसी लगी और उनके रिव्यु से बिरयानी को ऑल्टर करके बिरयानी को सही करते थे और हम लोगों ने घर के पास में ही एक शॉप ले लिया था और शॉप लेने के बाद हम लोग बहुत परेशान थे।

डिसाइड तो हो गया की बिरयानी का धंधा करना है

डिसाइड तो हो गया की बिरयानी का धंधा करना है लेकिन अब नाम क्या डिसाइड किया जाए तो मैंने अपने फादर से बोला की फादर दुबई में ओके मतलब Mashi होता है, तो हम लोगो ने डिसाइड किया की हम लोग Mashi नाम रखेंगे, तो जो Mashi की शॉप हम लोगों ने खोली थी, वो। उतनी बड़ी नहीं थी बस खोल लिया था । अब हमारा मेन मकसद था की इसको बड़ा ब्रैंड कैसे बनाया जाए। अब बड़े ब्रैंड को बनाने के लिए मार्केटिंग करना बहुत टफ होता है। मैं क्या करता था? मुझे आज भी याद है कि मैं फ्लेर पैम्फ्लेट ब्रोशर कैटलॉग लेकर के मैं लखनऊ के एक एक घर, एक एक अपार्टमेंट मेरी जो मार्केटिंग स्ट्रैटिजी थी वो बिल्कुल डिफरेंट थी। मैंने लखनऊ में कोई घर छोड़ा नहीं। अलीगंज आशियाना, गोमतीनगर। इंद्रा नगर चौक राजाजीपुरम कोई ऐसा एरिया नहीं होगा, कोई घर ऐसा नहीं होगा जहाँ मैं शायद ना गया हूँ या मेरी टीम ना गई हों करते थे। उनको बताते थे कि मैं हूँ, लीजिये और आप आ करके हमारे यहाँ बिरयानी एक बार टेस्ट करिए और इस तरीके से हम लोग धीरे धीरे ह इस तरीके से मार्केटिंग करना वहाँ पर स्टार्ट कर दिए थे।

9 से 200 किलोमीटर स्कूटी डेली चलाता हूँ।

मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं आज भी दोस्तों 9 से 200 किलोमीटर स्कूटी डेली चलाता हूँ। मैं फ़ोर व्हीलर आज offered कर सकता था लेकिन मैं 9, 200 किलोमीटर स्कूटी क्यों चलाता हूँ? ताकि ट्रैफिक में ना फसे और अपने सारे काम को प्रॉपर्ली अंजाम तक पहुंचा सकूँ।लखनऊ से सटे शहर कानपुर है, कानपुर चला जाता हूँ स्कूटी से और कानपुर में जा करके मैं वहाँ पर भी जीतने रेजिडेंशियल एरिया है। इतने कॉलेजेस है जीतने हॉस्पिटल्स है। मेरी टीम वहाँ पर जाती है और जाने के बाद उनको एप्रोच करती है कि आप अगर आउटिंग करने लखनऊ में आ रहा है कि लखनऊ से कानपुर का जो किलोमीटर है वो 90 किलोमीटर है। तो आप अगर 90 किलोमीटर के लिए अगर आप बिरयानी खाने के लिए आना चाहते हैं तो आप बिलकुल आइये और एक बार आ करके हमारी बिरयानी टेस्ट करिए और बड़ी मेहनत से बड़ी शिद्दत से हम लोगों ने यह brand को डेवलप किया है। इस तरीके से हम लोग मार्केटिंग वहाँ पर करना स्टार्ट कर दिया है।

आज हम करोड़ों का कारोबार के माध्यम से कर रहे हैं

उसकी वजह से बहुत ज्यादा भीड़ मेरे रेस्टोरेंट में आने लगी आप बिरयानी खिलाते जाइए, बिरयानी खिलाते जाये तो हम लोगों ने उस दिन करीब 12 से 14 बिरयानी लखनऊ और कानपुर वालों को खिलाई थी, लेकिन मुझे पूरा भरोसा था कि आज जो लोग खायेंगे यही कस्टमर हमारे आने वाले टाइम में रिपीटेड कस्टमर होंगे और जो mashi को ऊपर मुझे वो काम तक ले करके जाएंगे और धीरे धीरे ये सब चीजों को करते करते करते करते हमारी सेल में ग्रोथ आना स्टार्ट हुआ और मुझे आज आज भी याद है। जब हम लोगों ने स्टार्ट किया था तो हमारी सेल ₹3000 प्रतिदिन हुआ करती थी। लेकिन आज हम करोड़ों का कारोबार के माध्यम से कर रहे हैं।

ज़िंदगी है ना, ये आपको दोबारा नहीं मिले गी

दोस्तों ये जो ज़िंदगी है ना, ये आपको दोबारा नहीं मिले गी? आपको जो भी करना है सब इसी लाइफ में करना है। अगर आप ये सोचो कि मैं कर लूँगा और जा करके लाइव को सही कर दूंगा। नहीं दोस्तों आप नहीं कर सकते जो करना है आपको सब कुछ इसी लाइफ में करना है। आपको दोबारा भगवान मौका नहीं देंगे। जो लोग मर करके भगवान के पास जाते हैं वो जाके बोलते है की भगवान एक बार हमको और जिंदा कर दो अब की बार जाकर के ये करूँगा आपकी बार वो करूँगा। भगवान बोलते है मर चूके हो। अब तुम को मौका नहीं दिया जाएगा एक बार आपको मौका देंगे, बार बार आपको नहीं देगी। क्या आप उसको रिवाइंड करके सही कर दो? इसलिए दोस्तों अपने अंदर का जो टैलेंट है, हर आदमी के अंदर भगवान एक गॉड गिफ्टेड कुछ ना कुछ दिया हुआ है तो आप उसको तराशी है और कि आपके अंदर का इन्नर टैलेंट क्या है और उस पर काम करिए।

बहुत सारे लोग हैं जो हमेशा एक्स्क्यूस देते हैं। आपको एक्स्क्यूस नहीं देना है अगर आपको स्टार्ट करना है तो आपको कल से स्टार्ट कर देना है आप एक्स्क्लूसिव कर देंगे तो कभी आप लाइफ में कामयाब नहीं होंगे जो करना है आज से आपको स्टार्टअप कर देना है आज से नहीं बल्कि अभी से स्टार्ट अप

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