Prem Ganapathy Success Story

Prem Ganapathy Success Story – कहानी है तमिलनाडु में रहने वाली 117 साल के बच्चे की, जिसका नाम था प्रेम गणपति। उनके फादर एक किसान थे। जीस वजह से वो अच्छा खासा पैसा नहीं कमा पाते थे। तो इसीलिए प्रेम ने भी ये डिसाइड किया की वो भी अपने स्कूल छोड़कर किसी काम पर लग जाएंगे और टेंथ क्लास से पास आउट हो जाने के बाद वो एक कॉफी शॉप पर काम करने चले गए। ऐसा तो यहाँ से वो कमा रहे थे लेकिन सिर्फ इतना पैसा ही कमा पा रहे थे की वो अपने घर का सिर्फ घर संभाल सके।

1 दिन उनके शौक पर एक आदमी आया

1 दिन उनके शौक पर एक आदमी आया तो महंगा सूट पहना हुआ था और काफी अमीर लग रहा था। प्रेम उस आदमी के पास गए और उससे ऑर्डर लेते हुए उन्होंने उससे पूछा की सर आप कहा से हो तो उस आदमी ने बोला की मैं मुंबई से हूँ। बस तभी से ही प्रेम के माइंड में भी ये जिद बैठ गई कि मुझे भी मुंबई जाकर ही कुछ काम करना है और प्रेम ने उस आदमी से उसको मुंबई ले जाने के लिए बहुत रिक्वेस्ट की। कई बार मना करने के बाद फाइनली वो उसको मुंबई ले जाने के लिए तैयार हो गया। फिर अगले ही दिन उन्होंने घरवालों से इजाजत ली और वो दोनों मुंबई के लिए रवाना हो गए। अब जब प्रेम उस आदमी के साथ मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर पहुंचे तो वो आदमी प्रेम से ये कहकर चला गया की मैं अभी थोड़ी देर में आ रहा हूँ लेकिन वो वापस ही नहीं आया।

इस वजह से प्रेम उस अनजान शहर में बिल्कुल अकेले रह गए और तमिलनाडु का होने की वजह से वो ठीक से हिंदी भी नहीं बोल पा रहे थे और इसी वजह से उनकी परेशानी और ज्यादा बढ़ गई। स्टेशन में यहाँ वहाँ भटकने के बाद उनको फाइनली एक तमिल आदमी मिला। उस आदमी से प्रेम ने वो सारी बातें बताई जो उनके साथ हुई। अब वो आदमी प्रेमउस आदमी से तमिल लैंग्वेज में ही यह साफ साफ कह दिया मैं घर नहीं जाएगा, मैं यहीं रहकर काम करेगा।

प्रेम घर वापस नहीं जाना चाहते थे

फिर कुछ टाइम यहाँ वहा काम ढूंढने के को अपने साथ एक मंदिर में ले गया जहाँ पर वो लोगों से उनके घर जाने के लिए पैसे इकट्ठे करने लगा लेकिन प्रेम घर वापस नहीं जाना चाहते थे तो प्रेम ने बाद प्रेम को एक बेकरी शॉप में बर्तन साफ करने का काम मिल गया। और इसके साथ यहाँ पर उनके रहने का भी इंतजाम हो गया। वहाँ पर उन्होंने कुछ टाइम तक काम किया, लेकिन प्रेम सिर्फ इसी काम को करते रहने से सैटिस्फाइड नहीं थे। उन्होंने शॉप के ओनर से बोला की उनको वो कुछ और काम भी दे, लेकिन ओनर उनकी बात टाल दिया करता था।

1 दिन प्रेम ने शॉप ओनर से कहा की प्लीज़ मुझे बेकरी के फ्रंट पर काम करने दीजिये ताकि लोगों का मुझ से इंटरैक्शन हो सके और वो मुझसे मिल जाए। लेकिन बेकरी के मालिक ने उनको इस काम से साफ इनकार कर दिया। इस वजह से प्रेम ने वहाँ से काम छोड़कर उस बेकरी के पास ही एक चाय की दुकान थी। वहाँ पर काम करने चले गए। चाय की दुकान में प्रेम को एक वेटर का काम मिला। यह काम प्रेम को काफी ज्यादा अच्छा लगा क्योंकि इस काम से प्रेम ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल रहे थे और उनसे अपनी कम्यूनिकेशन्स बढ़ा रहे थे। हम अपने कस्टमर्स को बहुत अच्छे से सर्व किया करते थे और उनकी छोटी से छोटी जरूरतों का भी ख्याल रखा करते थे।

प्रेम को उसकी सर्विस के लिए ₹1000 तक भी टिप मिल जाया करती थी

इस वजह से ही जहाँ दूसरे को सिर्फ ₹300 के आसपास एक टेप मिलते थे, वहीं प्रेम को उसकी सर्विस के लिए ₹1000 तक भी टिप मिल जाया करती थी और यहीं पर ही छिपा है एक बिज़नेस का पहला गुड रिलेशन। शिप विथ युअर कस्टमर्स। हमने वेटर जैसे बहुत छोटे काम को भी काफी सीरियसली लिया। उन्होंने अपने कस्टमर्स को अच्छी से अच्छी सर्विस देने की कोशिश की जिससे उनके कस्टमर्स उनसे बहुत कुछ रहते थे और यही वो रीज़न था। जीस वजह से ये प्रेम दूसरे के मुकाबले काफी अच्छा पैसा कमा पाते थे। प्रेम अपने कस्टमर्स की पसंद को इतना अच्छे से ध्यान में रखते थे कि उन्होंने अपने कस्टमर्स की छोटी छोटी आदतों को भी याद कर लिया। प्रेमने याद कर लिया है की कौनसा कस्टमर किस तरह की चाय पीना पसंद करता है और कौनसा कस्टमर लंच के साथ कोल्ड ड्रिंक लेना पसंद करता है।

इतनी छोटी छोटी डिटेल्स को भी ध्यान में रखने की वजह से उनके कस्टमर्स उनसे बहुत कुछ रहते थे और उनकी तारीफ भी करते थे। अपने कस्टमर्स के प्रति इतने अच्छे रिलेशन को देखकर एक बार एक आदमी ने उन्हें अपने साथ काम करने का ऑफर दिया। उस आदमी ने ये कहा की हम 5050 में एक बिज़नेस शुरू करते हैं, जीसको तुम संभालोगे और पैसा मैं लगाऊंगा। क्या तुम तैयार हो? प्रेम को? यह आइडिया काफी अच्छा लगा। उन्होंने फट से इस आइडिया को एक्सेप्ट कर लिया। फिर कुछ ही टाइम में प्रेम और उस आदमी ने मिलकर एक शुरू कर दी। शुरू होते ही काफी अच्छी चलने लगी सिर्फ एक महीने के अंदर प्रेम ने। उसने बिज़नेस के रोग काफी इनकम जेनरेट कर ली जिससे उनके हिस्से में आठ से ₹10,000 पर मंथ आने लगे। लेकिन गाइस प्रेम की दिक्कतें यहाँ खत्म नहीं हुई थी।

अच्छी चलती हुई देखकर उनके पार्टनर के मन में लालच आया

इतनी अच्छी चलती हुई देखकर उनके पार्टनर के मन में लालच आया और उन्होंने प्रेम को उस टी शॉप से ही निकाल दिया और उनकी जगह पर किसी दूसरे आदमी को कम सैलरी पर रख लिया। अब अचानक ही इन्सिडेन्स होने की वजह से प्रेम कुछ टाइम के लिए सदमे में आ गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी क्योंकि उनको बहुत आगे जाना था और गाइस यहीं से ही मिलता है। दूसरा लहसन बी केर्फुल वेन यू अर लुकिंग फॉर आर पार्ट्नर देखो। बिज़नेस स्टार्टअप में इस तरह की चीजें होती रहती है लेकिन कई बार इससे लोगों को भारी नुकसान भी उठाना पड़ जाता है।

इसलिए अगर आप किसी के साथ पार्टनरशिप करते हैं तो आपको एक रिटर्न अग्रीमेंट जरूर साइन करना चाहिए। साथ ही साथ पाटनरशिप करने से पहले आपको दूसरे इंसान के बारे में अच्छे से जान लेना चाहिए की वो आपकी पार्ट्नरशिप के लायक है भी या नहीं और यह पता कर सकते हैं उसके बिहेव्यर से की वो नोर्मल्ली किस तरह से बिहेव करता है। इसके बाद प्रेम वापस अपने गांव चले गए। उन्होंने अपने अंकल से ₹1000 ट्रेन के टिकट के पैसे उधार लिए और अपने भाई के साथ फिर से मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद प्रेम ने अपने भाई के साथ मिलकर एक साउथ इंडियन स्टॉल लगाया क्योंकि तमिलनाडु का होने की वजह से उनको काफी अच्छा साउथ इंडियन खाना बनाना आता था। प्रेम का ये स्टॉल कुछ ही दिनों में बहुत फेमस होने लगा क्योंकि ऐसा है। बिटवा प्ले स्टोर में लोगों को बहुत ही अच्छी सर्विस देते थे।

वो अपना खाना बहुत ही सफाई से बनाते थे

एक स्टॉल लगाने के बाद भी प्रेम प्रोफेशनल जैसी ड्रेस पहना करते थे। वो अपना खाना बहुत ही सफाई से बनाते थे और उसको बहुत ही सलीके से लोगों के सामने पेश किया करते थे। लोगों को प्रेम का इस तरह से खाना बनाकर पेश करना बहुत अच्छा लगता था क्योंकि वहाँ के ज्यादातर लोग इतने अच्छे सर नहीं कर पाते थे। प्रेम के इसी काम से अट्रैक्ट होकर उनके स्टॉल पर भीड़ लगी रहती थी और यहीं से आता है हमारा तीसरा ले सन। यू एस पी यानी की यूनीक सेलिंग पॉइंट देखो। बिज़नेस तो सभी करते हैं लेकिन वही बिज़नेस लंबे टाइम तक चल पाता है और ग्रो करता है। जिसमे कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के लिए कुछ नई चीजें की जाती हो और प्रेम के बिज़नेस में बहुत सी ऐसी चीजें थीं जिससे उनका कस्टमर उनकी तरफ ईज़ी अट्रैक्ट हो जाता था और यही वजह थी कि उनका बिज़नेस काफी तेजी से ग्रो हो रहा था।

अब ये बिज़नेस एक अच्छी ग्रोथ पकड़ी रहा था के तभी इस बिज़नेस को किसी की नजर लग गई। जिसे जगह पर ये स्टॉल था वहाँ के लोग प्रेम को उनका स्टॉल हटाने के लिए फोर्स करने लगे और प्रेम को ना चाहते हुए भी वो स्टॉल हटाना पड़ गया। इसके बाद उन्होंने बस स्टॉप के सामने अपना स्टॉल लगाना शुरू कर दिया। लेकिन वहाँ भी लोगों ने प्रेम को अपना बिज़नेस करने ही नहीं दिया। और वहाँ से भी उनको वो स्टॉल हटाना पड़ गया। इन सब चीजों से परेशान होकर प्रेम ने किसी से लोन लिया और स्टॉल लगाने के लिए एक जगह रेंट पर ले ली।

साउथ इंडियन फूड्स के नाम से अपनी दुकान शुरू कर दी

उन्होंने वहाँ पर साउथ इंडियन फूड्स के नाम से अपनी दुकान शुरू कर दी। लेकिन गाइस इतना लंबा चौड़ा नाम उनको कुछ जज नहीं रहा था और उनको यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि इसका नाम बदलकर और क्या रखना चाहिए? अभी उन्होंने और रिसर्च की अलग अलग तरह के बिज़नेस को अनैलिसिस किया और इसी तरह डू यू वॉन्ट टू राइट बट डोंट नो हाउ टू गेट स्टार्टेड डू यू हैव मल्टिपल थॉट सन आइडिया। इस रनिंग इन ट्यूमर के अलग अलग तरह के बिज़नेस को अनैलिसिस किया और इसी तरह उनको रिसर्च करते हुए यह पता लगा कि कोका कोला कंपनी ने अपने नाम के आगे कोका सिर्फ इसलिए लगाया था क्योंकि ये वर्ड्स सुनने में काफी अच्छा लगता है। यहाँ तक मेरे दुकान का सवाल है। मेरी दुकान की सबसे बड़ी खासियत है मेरा डोसा। तभी प्रेम ने ये सोच लिया कि वो अपनी दुकान के नाम के आगे डोसा वर्ड जरूर यूज़ करेंगे। जिसमें प्रेम अपनी दुकान शुरू कर रहे थे तब उनके दुकान के आसपास का ही सारे प्लाज़ा बन रहे थे। इसीलिए प्रेम ने रेंटमे ली अपनी दुकान का नाम डोसा प्लाज़ा रखने का सोचा।

ये नाम उनको सुनने में काफी अच्छा लग रहा था। तो उन्होंने अपनी दुकान का नाम डोसा प्लाज़ा ही रख लिया। प्रेम की नई दुकान शुरू हो जाने के बाद काफी अच्छी लगी क्योंकि अब लोग उनको जान गए थे। इसीलिए जीतने पहले लोग आते थे, अब उससे और भी ज्यादा आने लगे। अपने बिज़नेस को चलाने में जब भी प्रेम को परेशानी होती थी तो वो ये सोचते थे अगर मैकडोनाल्ड जैसी बड़ी कंपनी होती तो वो अपने बिज़नेस को चलाने के लिए क्या करती? इस तरह सोचकर अपनी हर मुश्किल को आसान कर लेते थे और यहीं से आता है चौथा जो की है लर्न फ्रॉम मदर्स। जितनी भी सक्सेसफुल बिज़नेस मैन हैं वो दूसरी कंपनी ज़ोर दूसरे लोगों से काफी कुछ सीखते है। जीवन कुछ तो उनको अपना भी समझते हैं। प्लाज़ा में डोसा की टोटल 27 अलग अलग रेसिपीस बनाई जाने लगीं। क्योंकि लोगों को बहुत पसंद आ रही थी। इतनी सारी वैराइटी सिर्फ उन्हीं की दुकान पर मिलती थी।

इससे प्रेम के बिज़नेस को एक बहुत बड़ा सक्सेस मिला

इससे प्रेम के बिज़नेस को एक बहुत बड़ा सक्सेस मिला। यहाँ से हम को लहसन फाइव मिलता है, जो की है ऑन अब उनके बिज़नेस को इतनी जल्दी ग्रो होते हुए देखकर बहुत से लोगों ने उनकी रेसीपीस को कॉपी करना शुरू कर दिया। इस वजह से प्रेम को अपनी रेसिपी इसका कॉपीराइट कराना पड़ा। प्रेम की दुकान पर सिर्फ मिडल क्लास लोग ही नहीं बल्कि बड़ी बड़ी गाड़ियों में अमीर लोग भी आते थे। वहाँ प्रेम की शॉप से कुछ ही दूरी पर एक नया सेंट्रल शॉपिंग मॉल बन रहा था। एक बार उसी शॉपिंग मॉल के मालिक प्रेम के पास डोसा खाने के लिए आए और उन्होंने प्रेम से ये कहा की आप हमारे शॉपिंग मॉल में अपनी शॉप की एक फ्रैन्चाइज़ ओपन कर लीजिये। कैसे हो सकता है आपके बिज़नेस को फायदा हो जाए। प्रेम को शॉपिंग मॉल के ओनर का ये आइडिया काफी अच्छा लगा। उन्होंने उनकी बात मान ली और शॉपिंग मॉल में एक जगह ले ली। शॉपिंग मॉल शुरू होते ही डोसा प्लाज़ा में एक ही दिन में 40,000 से भी ऊपर की सेल्स कर ली और सिर्फ एक महीने के अंदर उन्होंने उस वक्त 12,00,000 से भी ज्यादा पैसे कमा लिए।

इस तरह से प्रेम ने एक के बाद एक डोसा प्लाज़ा की फ्रैन्चाइज़ का ही अलग अलग जगहों पर और खोल दी, जिसके बाद देखते ही देखते प्रेम का बिज़नेस सिर्फ इंडिया के अलग अलग शहरों में ही नहीं बल्कि न्यूज़ीलैंड और यूएई जैसे बड़े देशों में भी फैल गया। ऐंड आज के टाइम में डोसा प्लाज़ा के 45 आउटलेट्स हैं, जिसमें प्रेम को 30,00,00,000 से भी ज्यादा का प्रॉफिट होता है। पर देखो सक्सेस कभी भी पैसों की मोहताज नहीं होती। अगर लोग यह सोचकर अपना अगला स्टेप नहीं ले रहे है की एक बार मेरे पास ज्यादा पैसा आ जाये तभी मैं कुछ बड़ा कर पाऊंगा तो टाइम कब उनके हाथों से निकल जायेगा, उनको पता भी नहीं चलेगा। इसीलिए पैसों से ज्यादा अब क्या यूनिक बाकियों के मुकाबले कर सकते हैं? आपको उस पर फोकस करना चाहिए। क्योंकि यही होने ही आपको आगे चलकर कामयाबी की तरफ ले जाएगी ये वीडियो का इस अगर आपको पसंद हो तो

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