Radhakishan Damani Story in hindi

Radhakishan Damani Story in hindi राधाकिशन दमानी का जन्म 1 जनवरी 1954 को राजस्थान के बीकानेर शहर में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ। उनके फादर शिव किशन जी दमानी दलाल स्ट्रीट पर एक स्टॉक ब्रोकर हुआ करते थे। राधाकिशन दमानी का बचपन से ही पढ़ाई में मन नहीं लगता था। जगजाहिर है की मारवाड़ी का मन पैसे कमाने में ज्यादा लगता है वो ऐसे इंसान नहीं बनना चाहती थी जो केवल दो वक्त की रोटी कमाई खाई और सो जाएं बल्कि वे बड़े होकर एक बहुत ही अमीर व्यक्ति बनना चाहते थे और वो भी ऐसी जो कि लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकें। इसलिए उन्होंने अपने कॉलेज के पहले साल में ही पढ़ाई छोड़ दी।

डिग्री से ज्यादा जरूरी है पॉवरफुल थॉट्स का होना

उनका मानना था कि डिग्री से ज्यादा जरूरी है पॉवरफुल थॉट्स का होना, जिससे इंसान दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना सकता है। खैर, छोड़ने के बाद राधाकिशन दमानी ने अपना खुद का एक का बिज़नेस शुरू किया, लेकिन जब भी 32 वर्ष के थे तो उनकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ जिसने उनकी पूरी जिंदगी को एक नया मोड़ दे दिया था। दरअसल इस समय उनके पिता का देहांत होगया अपने पिता के जाने के बाद राधाकिशन ने पॉल पेरी के अपने इस व्यवसाय को छोड़ दिया और दलाल स्ट्रीट पर अपने बड़े भाई के साथ स्टॉक ब्रोकर के रूप में काम करने लगे। जब राधाकिशन ने शेयर बाजार की दुनिया में कदम रखा तो उस समय शेयर मार्केट पर मनु मानिक कोबरा भी कहा जाता है। जी हाँ, वही मनु मानीक जिन्हें आपने स्कैम 1992 में। देखा है। भले ही राधाकिशन दमानी ने एक स्टॉक ब्रोकर की तरह अपने कैरिअर की नई शुरुआत की, लेकिन इस दौरान उन्होंने बहुत ही जल्दी समझ लिया था कि अगर उन्हें बाजार से पैसा कमाना है तो उन्हें सिर्फ ट्रेडर होने के बजाय बाजार में अपने पैसे का ट्रेड करने की भी जरूरत है, क्योंकि ऐसे ट्रेडर बन कर वो अपने सभी सपने तो पूरे कर नहीं पाएंगे।

भारतीय शेयर बाजार में पैसों से trading का काम शुरू कर दिया

इसके बाद बहुत ही जल्द उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में पैसों से trading का काम शुरू कर दिया। अब जैसा की हमने आपको पहले भी बताया था कि दमानी मनुमानीक को अपना गुरु मान बैठे थे। जीनका ऐटिट्यूड इतना पसंद आया कि बस मनु मानिक के साथ स्टॉक मार्केट के सीक्रेट सीखने लगे और जहाँ मानु मानिक प्रॉफिट कमाते थे भी वही पैसा लगा कर प्रॉफिट बना दिया करते थे? अब 1987 में राकेश झुनझुनवालसे उनकी मुलाकात हुई। जहाँ राधाकिशन दमानी उनकी डाटा के बारे में ही स्ट्रक्चर रिसर्च की वजह से उनसे काफी प्रभावित हुए और राकेश झुनझुनवाला भी दमानी जी की बहुत इज्जत किया करते थे। फिर क्या था? अब मनु मानिक के साथ धमानी और राकेश झुनझुनवाला भी जुड़कर स्टॉक मार्केट में तबाही मचाने लगे।1990 में तो राधाकिशन दमानी ने शहर बजारमे में अपनी ट्रेडिंग से काफी प्रॉफिट कमाया। उनके पोर्टफोलियों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ शेयरों में। टी इंडस्ट्रीज़, इंडियन सीमेंट और ब्लू डार्ट जैसी कंपनियां शामिल थीं। राधाकिशन दमानी ने वीएसटी इंडस्ट्रीज में तब निवेश किया जब इस कंपनी के शेयर का मूल्य ₹85 प्रति शेयर हुआ करता था। ओवरऑल कहा जाए तो एक कोबरा से दामानी जी ने बहुत कुछ सीख लिया था,

उस समय दलाल स्ट्रीट में गुज राती और मारवाड़ी ये दो ग्रुप ही सबसे ज्यादा ऐक्टिव

तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उस समय दलाल स्ट्रीट में गुज राती और मारवाड़ी ये दो ग्रुप ही सबसे ज्यादा ऐक्टिव रहते थे, लेकिन पिछले काफी समय से मनु मालिक राधाकिशन दमानी और राकेश जैसे मारवाड़ियों का एक अलग ही मुकाम बन चुका था। इस स्टॉक मार्केट का एक नया खिलाड़ी पैदा हुआ, जिसका नाम हर्षद मेहता था। उस दौरान 1990 के दशक में हर्षद मेहता स्कैम के बाद स्टॉक मार्केट में काफी उथल पुथल मची हुई थी। उस समय हर्षद मेहता ने शेयर बाजार की तेजी पर दांव लगा दिया था। राधाकृष्णन् जी होशियार थे अपनी समझदारी के चलते पहले ही भांप लिया था। इसलिए दमानी ने दूसरे लोगों से हटकर बाजार की गिरावट पर दांव लगाया था। शेयर मार्केट में हुए घोटाले का खुलासा होने के बाद बाजार में गिरावट आई, जिससे दमारी ने शेयरों को शॉर्ट सेलिंग करके बहुत ही ज्यादा मुनाफा कमाया।

ऐसा बताया जाता है की सीबीआइ से लेकर खबरों तक को मनु मानिक और धमानी ने ही इन्फॉर्म किया। लेकिन एक बार धमानी खुद मानते हैं कि और बताते भी हैं की अगर 7-10 दिन हर्षद मेहता और रुक जाते हैं तो आज वो और उनके सभी ग्रुप मेंबर्स सड़क पर होते हैं और अभी तक तो आप लोग समझ ही गए होंगे दोस्तों की वो एक बहुत ही ज्यादा दिमाग लगा कर काम करने वाले। बाजार के सभी डाइमेंशन्स का यूज़ करके प्रॉफिट बनाने में उन्हें कोई टक्कर नहीं दे सकता है। 1995 में राधाकिशन दमानी ने एचडीएफसी बैंक के आईपीओ में पैसा लगाया, जिससे उन्होंने इस स्टॉक से भी बहुत मोटा मुनाफा कमाया था। इसके बाद उन्होंने रीटेल कारोबार में उतरने के बारे में सोचा, जिसके बाद साल 1999 में राधाकिशन दमानी ने नेरुल में अपना बाज़ार स्टोर की फ्रेंचाइज़ खरीदी। लेकिन उन्हें ये बिज़नेस मॉडल पसंद नहीं आया क्योंकि इस बिज़नेस में उन्हें कई तरह की लूपहोल दिखाई थी और उन्होंने आखिरकार ये काम बंद कर दिया।

यूनाइटेड स्टेट चले गए

उसके बाद वो यूनाइटेड स्टेट चले गए और वहाँ जाकर उन्होंने वॉलमार्ट के बिज़नेस मॉडल को समझा। उन्होंने देखा कि किस तरह बड़ी बड़ी रीटेल बिज़नेस कैसे वर्ल्ड लेवल पर काम करती है और इसी तरह वह कई देश का है। जहाँ उन्हें रीटेल बिज़नेस को समझने के लिए दिन रात उन्होंने एक कर दिया। इसके बाद 2002 में आखिरकार राधाकिशन दमानी ने मुंबई के पवई में डी मार्ट नाम का एक अपना पहला स्टोर इस्टैब्लिश किया। आप यकीन मानिये उन्होंने पहले अपने ही एक स्टोर से मुनाफा कमाया और फिर धीरे धीरे अपने इस बिज़नेस को आगे बढ़ा दिया।

अब यहाँ सबसे बड़ी समझदारी उन्होंने यह दिखाई कि उन्होंने इस मुनाफ़े को कस्टमर्स के फायदे के लिए दोबारा अपनी प्रॉफिट इन्वेस्ट करता है ताकि कस्टमर्स को मार्ट से बांधकर रखे उन्होंने बहुत ही पेशेंट से काम लिया। इसी वजह से शुरुआती नौ सालों में आप साफ साफ देख सकते हैं कि उन्होंने रीटेल की मार्केट को समझते हुए साल 2011 तक पूरे देश भर में डेमॉर्ट चीन के सिर्फ 25 स्टोर ही खोले थे जबकि वो प्रॉफिट अच्छा खासा कमा रही थी। लेकिन इसके बाद जो हुआ वो अनबिलीवेबल था। क्योंकि 2010 से लेकर 2021 तक आज देशभर के 11 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में अपनी कंपनी के 238 स्टोर्स है, जिसमें से 80% ज्यादा स्टोर डेमॉर्ट के खुद के है। मतलब की डेमॉर्ट के ज्यादातर स्टोर किराये पर नहीं है। सभी स्टोर कंपनी के अपने स्टोर है।

डीमार्ट कंपनी की वैल्यू 2,00,000 करोड़ से भी ज्यादा

आज राधाकिशन दमानी के डीमार्ट कंपनी की वैल्यू 2,00,000 करोड़ से भी ज्यादा की है और वर्तमान में वे भारत के सबसे ज्यादा अमीर व्यक्तियों की सूची में भी शामिल हैं। इतना ही नहीं वो अभी कुछ समय पहले इसलिए सुर्खियों में आ गए थे क्योंकि उन्होंने 1000 करोड़ का एक बंगला खरीदा था। डीमार्ट को मैनेज करने वाली कंपनी एवेन्यु सुपरमार्ट्स मार्च 2017 में लिस्ट की गई और पिछले चार सालों में इस कंपनी ने अपनी इश्यू प्राइस रिटर्न दिया है और अगर आप इस कंपनी पर थोड़ा भी शक करते हैं तो शायद आपको इतना जरूर सोचना चाहिए क्योंकि अगर ये कहा जाए कि इस कंपनी को वो चला रही है जिन्होंने अपना 14 साल का करियर मनुमानिक जैसे स्टॉक ब्रोकर और झुनझुनवाला जैसे लोगों के साथ गुज़ारा है और इनके कॉम्पिटिटर में भी हर्षद मेहता और केतन पारिख जैसे बड़ी हुआ करती थी।

अब आइये दोस्तों इसके बाद आपको बताते हैं कि आखिर कैसे यह इतना बड़ा नाम बना और आज रीटेल में कोई क्यों इसे कोई टक्कर नहीं दे पा रहे हैं। देखिये अगर डी मार्ट के प्रॉफिट की बात करें तो जो इसमें अहम रोल प्ले करता है वो है इनकी खुद की जमीन पर इनके स्टोर का होना। ये बात तो हम सब जानते हैं कि कोई भी रिटेल स्टोर अच्छी जगह खोलने के लिए आपको जमीन की जरूरत पड़ती ही है। अब बात आती है इतने बड़े रिटेल चेन स्टोर को खोलने के लिए जमीन या तो खुद की होनी चाहिए या फिर उसे किराये पर लिया जाए। लेकिन दोस्तों ये बात तो हम भी सब जानते हैं कि अगर आप जमीन को किराये पर लेते हैं तो आपको जीवन भर उसका किराया चुकाना पड़ता है, जिसकी वजह से आप अगर कुछ अच्छा प्रॉफिट अपने स्टोर से कमा भी रहे वो भी आपको अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ किराये में ही चुकाना पड़ जाता है और इस भार को आपको हर महीने अपने बिज़नेस के जरिए ही निकालना पड़ता है।

दुनियाभर की रिटेल मार्केट का घूमकर रिसर्च

जब दामनी इंडस्ट्री में आ रहे थे तो उन्होंने दुनियाभर की रिटेल मार्केट का घूमकर रिसर्च और मार्केट के सभी डाइमेंशन्स को अच्छे से देखा था कि मार्केट से किस पर कमाया जा सकता है और किस तरह की गलतियाँ कम करके प्रॉफिट को मैक्सिमम किया जा सकता है। बाजार को समझते हुए क्या करना है? क्या नहीं करना है? इस लिस्ट में उन्होंने खुद की कंपनी यानी को इस किराये के झंझट से काफी दूर रखा। डी मार्ट कोई भी स्टोर खोलने के लिए अपनी खुद की जमीन खरीदता है ताकि आगे चलकर जमीन के किराये का भार उस पर ना रहें।

अगर डी मार्ट उस जगह पर जमीन नहीं खरीद पाता है अब वो कुछ सालों के लिए लीज पर ले लेता है जिससे उसे एक बार इन्वेस्टमेंट करके कई सालों तक पैसा नहीं देना पड़ता है। अब जब डी मार्ट में जमीन के किराये का पैसा बचा लिया तो सामान तो सस्ता मिलेगा ही। कई सुपरमार्केट किराये की जमीन का पैसा आपके द्वारा खरीदे गए सामान से ही वसूलते हैं, जिसके कारण उनकी कीमत काफी बढ़ जाती है। यही गलती दूसरे कई सुपरमार्केट लगातार करते हुए देखा होगा। कैसे एक साथ हजारों सूपर मार्केट्स कई शहरों में खोल दिए जाते हैं। आपने भी नोटिस किया होगा कि कैसे जब कोई नया स्टोर खुलता है तो उस पर फ्रैन्चाइज़ी कितना पैसा खर्च करती है।

अब तक 200 से ज्यादा स्टोर खोले है

वहीं दूसरी तरफ ऐसा बिल्कुल भी नहीं करता। अब तक 200 से ज्यादा स्टोर खोले है demart ने दूसरे स्टोर से प्रॉफिट कमाकर यानी पहले इतना मुनाफा कमाता है कि कोई नया स्टोर खोल पाए तब जाकर वह सोच समझकर एक अच्छी जगह पर अपना स्टोर खोलता है। डेमॉर्ट को धीमी चाल से चलना पसंद है और इसे धीमी चाल के आज यही बात हर एक बिज़नेस और बिजनेसमैन को समझने की चाहिए। दोस्त को की आप पहले एक स्टोर पर पूरी तरह ध्यान देकर वहाँ से जब तक प्रॉफिट ना बना ले तब तक दूसरे स्टोर की तरफ नहीं पड़ना चाहिए।

अब इसके बाद आते है डेमॉर्ट की दूसरी ताकत की तरफ। जीस वजह से वो कस्टमर्स के बीच काफी फेमस है और अपने कस्टमर्स की वजह से आज रीटेल का। राजा बना हुआ है। लेकिन दोस्तों अगर आप डीमार्ट गए हैं तो आपको पता होगा कि डीमार्ट मैं हमेशा यानी 12 महीनों तक आपको डिस्काउंट मिलता है। इसके अलावा अगर आप किसी और सुपरमार्केट में चाहते हैं तो उसी प्रॉडक्ट पर आपको आसानी से उतना डिस्काउंट नहीं मिल पाता। अपने ग्राहकों को अपने से जोड़ने के लिए कभी भी दिखावे वाला डिस्काउंट तो नहीं पीता है।

दिखावे वाला डिस्काउंट तो नहीं करता है,

डी मार्ट अपने ग्राहकों को अपने से जोड़ने के लिए कभी भी दिखावे वाला डिस्काउंट तो नहीं करता है, बल्कि इनके स्टोर्स पर आपको डेली डिस्काउंट मिलते हैं। इस डिस्काउंट के कारण ही लोग डी मार्ट आना और शॉपिंग करना भी पसंद करते हैं। अभी मार्ट में आप जब गए होंगे तो आपको डिस्काउंट मिला होगा। लेकिन आप सोचिए। दिमाग को इतना डिस्काउंट कैसे मिल जाता है के वो आपको रोजाना डिस्काउंट दे पाते हैं और जब इतना डिस्काउंट दे देता है तो उसकी कमाई कैसे होती? क्या आपने कभी सोचा है की भला ऐसा क्या करता है जो दूसरों के मुकाबले सबसे ज्यादा डिस्काउंट दे पाता है? देखिये मैं आपने जो भी प्रॉडक्ट देखे होंगे। रखने के लिए उन प्रॉडक्ट की कम्पनीज़ डेमार्ट को भारी भरकम फीस देती है ताकि वो प्रॉडक्ट वहाँ उसे प्लेस हो सके, जहाँ वह चाहते हैं और जल्दी जल्दी प्रोडक्ट्स बिक बी जाए मार्ट में लार्ज क्वांटिटी में जल्दी प्रॉडक्ट बिक जाते हैं।

इसलिए कंपनी डीमार्ट को फीस देने से हिचकिचाते नहीं है क्योंकि किसी भी दुकान या रीटेल स्टोर के मुकाबले उनका सामान जल्दी निकल जाता है। और उन्हें जल्द ही उनका मुनाफा वापिस मिल जाता है। और दूसरा सबसे बड़ा कारण ये भी है कि कोई भी दुकान हो या रिटेल सूपर मार्केट, वो एमआरपी से कम पर ही उस सामान को खरीदते हैं तो उन्हें उस सामान को लेते वक्त कंपनियां कई तरह के डिस्काउंट देती है, जिसके कारण उन्हें एमआरपी से काफी कम रेट पर सामान मिल जाता है।

कभी भी अपने शोरूम में फालतू खर्च नहीं करता है

आप डीमार्ट पर सामान काफी तेजी से और ज्यादा मात्रा में होता है। इसलिए डी मार्ट कंपनियों को कम समय में पैसा दे पाते दोस्तों। कई कंपनियां डी मार्ट की इस रणनीति को देखते हुए उन्हें और फिर डिस्काउंट देती है ताकि डी मार्ट उनके प्रोडक्ट्स को और ज्यादा इम्पोर्टेन्स दे सके। इसके बाद तीसरा सबसे अहम पॉइंट उस पर आते है वो है किसी भी ब्रांच या कंपनी की ब्रांडिंग या प्रमोशन। अब देखिये तो हम सब जानते हैं कि कंपनी खुद के ब्रैंड को प्रोमोट करने के लिए कुछ जगह कितना पैसा फूंक देती है और अक्सर ऐसा सुना भी जाता है कि जो दिखता है वही बिकता है।

लेकिन demart ने तो मार्केटिंग के इस कॉन्सेप्ट को ही फेल कर दिया। आप जानकर हैरान हो जाएंगे की डेमॉर्ट और जैसा बड़ा ब्रैंड कभी भी अपने शोरूम में फालतू खर्च नहीं करता है। जी हाँ, इनका सीधा सा कॉन्सेप्ट है कम खर्च में ज्यादा मुनाफा। इसलिए ये बात अपने रिटेल स्टोर पर सजावट, लाइट, स्टाफ आदि पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करता। जिससे डीमार्ट की काफी ज्यादा बचत हो जाती है और इस बचत को वह अपने कस्टमर्स पर डिस्काउंट देकर खर्च करता है और बदले में भरोसा कम आता है।

इसके बाद टी मार्ट मार्केटिंग के अकॉर्डिंग काम करता है। देखिये जैसे की अगर कोई भी स्टोर खोलता है तो पहले उस एरिया पर अच्छे से रिसर्च करता है। वहाँ उस एरिया में रहने वाले लोगों की जरूरतों को जानता है। यह पता करने की कोशिश करता है की यहाँ पर लोग कौन से लोकल ब्रैंड को ज्यादा पसंद करते हैं और कौन से बड़े ब्रैंड को खरीदना पसंद करते हैं। इसके बाद भी डीमार्ट अपने स्टोर में लोकल दोनों ब्रैंड्स के सामानों को रख पाए मान लीजिये की डिमांड सोनीपत शहर में खुला है, जहाँ पर लोगों को किसी लोकल ब्रैंड का अचार खूब पसंद है तो डी मार्ट उसे अपने सोनीपत के उस स्टोर में जरूर रखेगा।

सुपर मार्केट जाने की बजाये डी मार्ट जाना ही पसंद करते हैं

इस तरह लोग किसी बड़े नामचीन सुपर मार्केट जाने की बजाये डी मार्ट जाना ही पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें वहाँ उनका बेस्ट मिल जाता है। आज के समय में डेमॉर्ट आप अपने बिज़नेस को ऐसा बना चुका है कि उसे भारी भरकम डिस्काउंट देने में कोई भी नुकसान नहीं होता है और प्रॉडक्ट की कंपनियां भी खुश होकर को डिस्काउंट देती हैं। उन्हें पता है कि डीमार्ट मैं उनके प्रोडक्ट्स की खपत अच्छे से और ज्यादा होगी। इसके साथ ही उन्हें पैसे दूसरों के मुकाबले जल्दी बन जाएंगे। जिसकी बदौलत उनके बिज़नेस को चलाए रख। ये थी कहानी देश के सबसे बड़े रिटेल किंग के बादशाह और के ओनर राधाकिशन दमानी जी की उम्मीद करते हैं आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा।

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