Samosa singh story

Samosa singh story – इंडिया में कोई समोसे वाला इतना बड़ा बिज़नेस कैसे स्टार्ट कर सकता है और वो इस रन कैसे कर रहे हैं? 2004 में निधि और शिखर दोनों ही कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बायोटेक से अपने बैचलर्स की पढ़ाई पूरी कर रहे थे। फिर क्या था किसी रील लाइफ की तरह इस रियल लाइफ में भी निधि और शिखर एक दूसरे को अपना दिल दे बैठते हैं। 2007 में दोनों का कॉलेज खत्म होते ही समझ जाती है कि उनका मन बायोटेक में नहीं लगने वाला है और जहाँ वो एक यूएस बेस्ट कंपनी में मार्केटिंग जॉइन कर लेती है। इधर शिखर अपनी बायोटेक कोई कंटिन्यू रखते हैं और वो मास्टर्स करने के लिए हैदराबाद का टिकट कटवा लेते है।

शेखर के दिमाग की भक्ति को जला दिया

हैदराबाद में जब शिखर अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाते हैं, तब उनके ज्यादातर तो उस किसी भी जगह स्ट्रीट साइड फूड कोई खाना पसंद करते थे, जिसमें सबसे ज्यादा पसंदीदा फूड आइटम्स समोसा हुआ करता था। अभी 1 दिन स्ट्रीट फूड के अनहाइजीनिक तरीके ने शेखर के दिमाग की भक्ति को जला दिया और उसी टाइम उन्होंने अपने बिज़नेस के मास्टर प्लैन को सोच लिया था की अगर वो स्ट्रीट फूड एक स्टार्टअप खोल सकते हैं कि आज शिखर ने अपने समोसे के स्टार्टअप के पूरे मास्टर प्लैन को सोच लिया था। और उधर 2009 में उनका मास्टर्स भी कंप्लीट हो गया।

मास्टर्स कंप्लीट होते ही उनकी एक बायोटेक कंपनी में जॉब लग गयी। अपने स्टार्टअप लैन और जॉब के बीच वो अपने प्यार को नहीं बोले थे। इसलिए 2010 में तो उन्होंने सात फेरों के साथ ही सात जन्मों के लिए एक हो गए। शादी के बाद भी शिखर अपने समोसे के स्टार्ट नहीं करना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने निधि को इस बात के लिए मनाया कि वो भी स्टार्टअप में उनका साथ दे। लेकिन दोनों ने अपने अपने जॉब को फाइनैंशल बैकअप बनाने में और स्टार्टअप के प्लैन को एग्जिक्यूट करने के लिए रिसर्च करने वाला लगभग 5 साल का टाइम लगाया।

10,000 घंटे की रिसर्च

2005 में शिखर ने अपनी जॉब से रिजाइन दे दिया और निधि को वर्क फ्रॉम अप्लाइ करवाकर दोनों ने एक बार फिर अच्छी तरह से प्लैन बनाया। और इस पर 10,000 घंटे की रिसर्च करके अपने अपने रोल को डिसाइड किया। जिसमें निधि ने मार्केटिंग को संभालने की जिम्मेदारी ली तो शेखर ने पूरे स्टार्टअप को एग्जिक्यूट करने की जिम्मेदारी संभाली, जिसमें सबसे बड़ा फैसला था समोसे के शेप को ही बदल देना। ये इतना बड़ा फैसला था जो इन्हें लेकर भी डूब सकता था। समोसे के शेप को बदलने का आइडिया तो उन्होंने इसलिए बनाया है क्योंकि नॉर्मल समोसा अपनी त्रिकोणी शेप की वजह से ज्यादा तेल कर लेता है, जो देखने में ही अनहेलथी लगता है। इसीलिए समोसा, समोसा, हेल्थी भी रहे, इसीलिए उन्होंने इसके को बनाए रखा लेकिन उनके बॉर्डर्स को हटवा दिया। जिसकी वजह से अब ये समोसा नोरमल समोसे से। लगभग 50% से ज्यादा 50% कम कैलोरी वाला बन गया, जिसके बावजूद इन्होंने अपने मार्केटिंग में समोसे को हेल्दी नहीं बताया।

8000 समोसे ऑर्डर मिल जाता है

लेकिन एवर एवर प्रोमोट आर समोसा सैस हेल्थी क्योंकि हेल्थी नाम सुनकर लोग ये अंदाज़ा लगा लेते हैं की इसमें ज्यादा टेस्ट होता ही नहीं होगा। उनका दूसरा सबसे बड़ा प्लैन था। समोसे की फीलिंग के साथ नए नए एक्सपेरिमेंट्स करना जैसे की चिकन समोसा, पनीर समोसा, चॉकलेट समोसा के साथ साथ ड्राई फ्रूट समोसे गोभी लॉन्च करने का प्लैन बनाया था, जिसके कुछ ही दिनों बाद दोनों ने एक 300 स्क्वेयर फुट का किचिन और दो से तीन शेफ को चुनाई और यूनीक एक्सपेरिमेंट के लिए हायर किया और इस्मत ने उनका साथ दिया। और वो अपने नए एक्सपेरिमेंट में सक्सेसफुल भी रहे। इसीलिए वो सिर्फ दो महीनों के बाद ही रोज़ के करीब 500 से ज्यादा समोसे बेचने लगे थे। लेकिन निधि और शिखर को तो अभी और ऊंची उड़ान भरनी थी, इसीलिए नहीं थी। नहीं अपने मार्केटिंग एक्सपिरियंस का फायदा उठाकर बड़ी बड़ी कंपनी से समोसे का ऑर्डर लेने की कोशिश करती रहीं। लेकिन ज्यादातर जगह से उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ा, पर दौड़ने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार कोशिश करती रही। ऐसी बीच उन्हें एक कंपनी से 8000 समोसे ऑर्डर मिल जाता है।

इस ऑर्डर से जितना ये दोनों खुश थे उससे कहीं ज्यादा परेशान थे क्योंकि इतना बड़ा ऑर्डर था की इनका 300 स्क्वेयर फुट का किचन छोटा पड़ने वाला था। और उससे बड़ा चैलेंज था 8000 समोसे को करंसी रखना है। इसीलिए आपने किचिन की प्रॉब्लम को दूर करने के लिए उन्होंने अपने फ्लैट को बेच दिया और समोसे को रखने के लिए उन्होंने समोसे की क्योंकि इनको तीन स्टेप में मार दिया और सबको अलग अलग टास्क दे दिया ghar बेचकर 8000 समोसे बेचना खतरे से बड़ा जरूर था, लेकिन इन दोनों ने को पार कर लिया था।

इसके बाद इन्हें और भी दूसरी कंपनी से ऑर्डर मिलते रहे और धीरे धीरे इन्होंने पीवीआर और बाकी दूसरी ब्रैन्डस के साथ भी टाई अप कर लिया और फूड फेस्टिवल के साथ साथ समोसा फेस्टिवल करके भी इन्होंने अपनी सेल अच्छी खासी बढ़ा ली थी। लेकिन इन दोनों का दिल है तेरे में भी खुश नहीं हो रहा था। उनके अंदर से आवाज आ रही थी। ये दिल मांगे मोर और अपने दिल की सी आवाज को शांत करने के लिए तो उन्होंने एक ऐसे आदमी का नंबर ढूंढ निकाला जो ऐसे ही छोटे छोटे बिज़नेस में इन्वेस्टमेंट करते थे। शेखर ने जब उस नंबर पर कॉल किया तो सामने से किसी ने फ़ोन ही नहीं उठाया। शिखर ने जब दूसरी बार कॉल ट्री किया, इस पर भी किसी ने कॉल नहीं उठाया। कई बार कॉल करने पर भी जब कोई रिस्पॉन्स नहीं आया।

19 Crore Funding

निधि और शिखर सीधा उस आदमी के घर चले गए और एंट्री ना बनने पर वो घर के बाहर ही खड़े रहे ताकि कम से कम एक मीटिंग हो जाए। 2 दिन तक लगातार घर के बाहर खड़े रहने पर उनकी मीटिंग फिक्स हुई और मीटिंग में उन्होंने अपने समोसे को इस तरह प्रेजेन्ट किया कि वो उस मीटिंग से एक, दो या 10 नहीं बल्कि पूरे 19,00,00,000 की फंडिंग लेकर आये थे। 19,00,00,000 के फंड से इन दोनों में अपने साथ आउटलेट खोलकर उन्हें ऑटो पायलट सिस्टम पर कर दिया।

ये ठीक वैसा ही है जैसे आपको डॉमिनोस के सभी पिज्जा का स्वाद एक जैसा ही मिलता है। इस सिस्टम में किसी देश को एक फॉर्मूला बदल दिया जाता है और उसे सभी आउटलेट को दे दिया जाता है ताकि कस्टमर्स को हर जगह एक जैसा ही। मिले, जिसके बाद 2019 में समा सा। सिंह ने 200% की स्पीड से अपनी ग्रोथ की और आज उनकी मार्केट वैल्यू लगभग ₹600,00,00,000 है। फिलहाल वो अपने आउटलेट्स में रोज़ लगभग 25,000 सालों से बेच रहे हैं जबकि उनके टारगेट 1,00,000 समोसे पर डे बेचने का है।

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