Shiv khera life story | You Can Win

गाड़ियां साफ करने से लेके आज 1,00,00,000 किताबें बिक चुकी है

सब गाड़ियां साफ करने से लेके आज 1,00,00,000 किताबें बिक चुकी है। इसका राज़ जानना चाहते हो तो यह पूरी आर्टिकल पढ़िए मेरा नाम शिव खेरा है, मैं एक बिज़नेस परिवार से आया हूँ, माइंस बिज़नेस थी तकरीबन 800 1000 लोग हमारे पास काम करते थे और ये मुझे विरासत में मिली थी। माइंस नैशनलाइज हो गई, सरकार ने ले ली। उसके बाद हम सड़क पे चले आए। सड़क का मतलब सड़क। कुछ परिवारों के पास पैसे थे, हमारे परिवार के पास नहीं थे। मेरे फादर की डेथ हो गई थी जब मैं कॉलेज में खत्म किया था और मेरी शादी को तब सिर्फ चार ही हफ्ते हुए थे। साल के बाद मेरी बेटी पैदा हुई। और मेरे पास ₹10 नहीं थे, मैंने अपनी मदर की जूलरी बेच के पैसे लाए और अपनी बेटी को खाना खिलाया।

हमने उसके बाद मैंने तीन काम करने की शुरू कोशिश की। बिना पैसे के तीन में फेल हो गया उसके बाद 13 नवंबर 1975 मैं इंडिया छोड़ के कनाडा चला गया और क्योंकि मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूँ। मेरी ऐकैडैमिक्स हैं बी कॉम थर्ड डिवीज़न 10 वीं में फेल हो गया था। मैं तो मैंने बाल्टी लेकर घर घर जाकर गाड़ियां साफ करनी शुरू की तो तकरीबन डेढ़ साल तक मैं गाड़ियां साफ करता रहा वहाँ पे टोरोंटो में उसके बाद मैं टोटली by ऐक्सिडेंट लाइफ इन्श्योरेन्स भेजना शुरू किया तो सब लाइफ इन्श्योरेन्स जो बेचना था मेरे को मैं सोचता हूँ कि मेरी जिंदगी में सबसे अगर जो मोड़ आया है, अच्छा मोड़ आया है तो वहीं था एक क्योंकि इस वजह से कहता हूँ आज तकरीबन हर पैरेन्ट्स और हर टीचर अपने बच्चों को यह दो लफ्ज़ सिखाते हैं। सक्सीड & विन सक्सीड & विन सक्सीड सफल बनो जी तो सफल बनो दो ही सिखाते है साहब लेकिन जिंदगी हमेशा ऊपर नहीं जाती है।

अपने बच्चों को ये नहीं सिखाते की जिंदगी में फेल कैसे होना हैं

हम अपने बच्चों को ये नहीं सिखाते की जिंदगी में फेल कैसे होना हैं और असफल कैसे होना हैं और जब वह असफल होते हैं। तो क्या होता है? थे डोंट क्नोव how to हैंडल इट ऐंड दे गो इनटू डिप्रेशन में चले जाते हैं सुइसाइड कमिटमेंट करते हैं साहब। खैर मैं लाइफ इन्श्योरेन्स बेचनी शुरू की तो विदिन 90 डेज़। मेरे मैनेजर ने मुझे वापस बुलाया और बोला कि भैया मई ३५ साल से इन्सुरेंस बिज़नेस में हु तुम्हारे जैसे मई ने नहीं देखा तुम कल मत आना यू फायर्ड तो मैंने वो अपने मैनेजर को बोला जो भैया मेरे को फायर करने से पहले मेरी बात तो सुनो मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूँ और बी कॉम थर्ड डिवीज़न किया है, 10 वीं में फेल हो गया था।

अब तुम नौकरी से निकाल दिए गए बोले तुम जाओ अब तुम्हारे पास टाइम ही टाइम है सोचने का सब मैं 45 साल पहले उनका दफ्तर छोड़कर निकला वहाँ से उस दिन उस शाम को डॉक्टर नॉर्मन विन्सेन्ट पील, जिन्होंने किताब लिखी पॉज़िटिव थिंकिंग, वो टोरोंटो आए हुए थे तो मैंने सोचा कि उनका प्रोग्राम जाके अटेंड किया जाए। $35 मैंने उनको दिए और मैं जाके उनके प्रोग्राम अटेंड किया। तकरीबन 1000 लोग थे मैं भी था वहाँ पे। डॉक्टर पी एल मंच पे आये। तकरीबन उनकी उम्र 85 साल होगी। हाइट पाँच फुट एक इंच जूते के साथ दो इंच हो गया होगा। लेकिन जीस उत्साह से डॉक्टर बोले उसने से मैंने खद की परिभाषा बदल दी है।

इंसान का कद कभी जिंदगी में जिस्म से घर से नीचे नहीं नापा जाता है

इंसान का कद कभी जिंदगी में जिस्म से घर से नीचे नहीं नापा जाता है। हमेशा गर्दन से ऊपर नापा जाता है। तो साहब जिस आत्मविश्वास से उन्होंने सबको देखा। उस आत्मविश्वास के अंदर नम्रता थी क्योंकि जीस आत्मविश्वास के अंदर नम्रता नहीं होते होती। उसे अहंकार कहा जाता है। तो साहब पीले सब को देखा और बोले आप लोग बहुत शांत बैठे हो, आराम से लगता है, किसी को कोई समस्या नहीं है। तो पूछने लगे, किसी को कोई समस्या है तो किसी को समस्या नहीं है तो सबने हाथ खड़े होते तो डॉक्टर फील बोले कितने लोग समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो सब ने हाथ खड़ा कर दिया। डॉक्टर बोले की जब मैं यहाँ पे आ रहा था। 200 गज दूर यहाँ से मैंने एक जगह देखी वहाँ पर कुछ लोग एकदम रिलैक्स्ड कंफर्टेबल लेते पड़े थे। उनको कोई समस्या नहीं है।

कितने लोग जानना चाहते है कौन सी जगह है तो सब ने हाथ खड़ा कर दिया तो डॉक्टर फील बोले की 210 दूर यहाँ से एक शमशान घाट है। वहाँ पर लोग लेटे हुए है, एकदम रिलैक्स, निश्चिंत उनको कोई समस्या ही नहीं है। डॉक्टर कफील ने पूछा कितने लोग समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं? सब किसी ने हाथ खड़ा नहीं किया, सबने हाथ में डाल दिया सर। तब डॉक्टर फील बोले। की भैया समस्या एक जीवन का प्रतीक है। जब तक हम जिंदा रहेंगे, समस्या रहेंगी। जब समस्या ही नहीं रहे गी हम ही नहीं रहेंगे और जब समस्या कम होने लगे, खतरे की घंटी बजनी शुरू हो गयी। उस टाइम घुटने पर पहुँच जाना और भगवान से प्रार्थना करना की कुछ समस्या भेज दो भाई।

एक और मौका दो Dont Fire me

वो डॉक्टर का प्रोग्राम अटेंड करने के बाद मैं वापस अपने मैनेजर के पास गया। उसको बोला कि भैया मेरे को एक और मौका दो Dont Fire me कि अगर आप मुझे आज काम से निकाल देते हो तो मुझे मालूम नहीं मैं कहाँ पे जाऊंगा। मेरी एक बेटी है और मैं एक ही जगह याद है मुझे काम करने की वो गाड़ियां साफ करने की। मैंने कहा आप गाड़ियों में साफ करना नहीं चाहता हूँ। एक मौका और दो मैं तुम्हारे को कमिटमेंट देता हूँ आई विल नॉट लेट यू डाउन बिकॉज़ ऑफ? बट प्लीज़ ड्रॉ के पेपर्स तो सब उसने मेरे को देखा। कहता है शिव। ये तुम्हारी छोटी जीत नहीं है, बहुत बड़ी जीत है। कहता है कि मैं तुझे तब रहने दूंगा यहाँ पे अगर तुम एक कमिटमेंट अपने आप के साथ करो। मेरे साथ नहीं है अपने आप के साथ करो आई विल बी डॉन

उस दिन मैंने वो कमिटमेंट की और मेरी जिंदगी में एक वो टाइम आया तो उससे कागज विड्रॉ किये और उस साल। मैं ने जा के तकरीबन एक मिलियन डॉलर की इन्शुरन्स बेच। उसके अगले साल मैंने तकरीबन तीन मिलियन डॉलर की इन्शुरन्स बेची और करीबन फाइव मिलियन डॉलर्स। मैं अमेरिका चला गया। मैंने तीन बिज़नेस में काम शुरू किया, मैंने कैलिफोर्निया की अपना एक कंपनी खरीदी मैंने। मैंने कैलिफोर्निया की 1984 में उसका न्यू जर्सी ऑपरेशन शुरू किया विद नो क्लाइंट्स और मैंने अपनी कंपनी बेची।

तकरीबन 500 क्लाइंट्स के साथ प्रोग्राम अटेंड करने के बाद

विथ तकरीबन 500 क्लाइंट्स के साथ प्रोग्राम अटेंड करने के बाद मैंने अपनी जिंदगी में एक गोल बनाया। लक्ष्य की मेरे को एक किताब लिखनी है। विच विल बी कम इन्टरनैशनल बेस्टसेलर तो सब मैं कभी भी रेस्टोरेंट पे जाता था, कही बाहर जाता था तो कोई कागज पेंन मिल जाता तो वहाँ पर जो दिमाग में आता था, मैं नोट करके चला जाता था और नोट करके वापस घर आता था या दफ्तर में जाकर मैं उसको एक डब्बे में डालता चला जाता था, तो मेरे को ऐसे तकरीबन पहली किताब लिखते लिखते 25 साल लग गए 25 साल और उसके बाद मैंने अपनी सेक्रेटरी को डिक्टेट कराना शुरू किया। जब किताब थोड़ी थोड़ी बननी शुरू हुई तो उसके बाद मैंने पब्लिशर्स को कॉन्टैक्ट करना शुरू किया की भैया मेरी किताब तो मेरे को एक रिजेक्शन आ गई कि आपकी किताब न्यू जर्सी में था तो मैं जीतने पब्लिशर्स थे।

सब को चिट्ठी लिखी सब नहीं दिया कर दिया हमारे को अब कोई तो जवाब ही नहीं देते थे, फिर मैंने कहा चलिए यहाँ पर सबकी रिजेक्शन हो गयी, अब चलते है थोड़ा सा न्यूयॉर्क, न्यूजर्सी एरिया में और थोड़ा एक्सपैंड करते हैं तो मैंने एक और डायरेक्टरी मंगाई। सब कुछ चिट्ठियां लिखीं तकरीबन 30,40,50 लोगों ने कर दिया मुझे तो मैंने कहा की नैश्नल लेवल पे अब जाता हूँ, मैं थोड़ा और बड़ा सोचना चाहिए तो नैश्नल लेवल पे गया।

तकरीबन 100 चिट्ठियां लिखनी शुरू

मैंने चिट्ठियां लिखनी शुरू कर दी। तकरीबन 100 चिट्ठियां लिखनी शुरू लिखी तो सब सब पे। रिन्जेक्शन मिल गयी मुझे तो मेरे दिमाग में आया की भाई सब ने ये कर दिया। अब दुनिया का जो सबसे बड़ा पब्लिशर है उसको लिखता हूँ। क्या पता वो पकड़ लें? तो सात महीने प्रिन्टी सोलको लिए लार्जेस्ट पब्लिशर उसको। चिट्ठी लिखी है। मैंने कहा हो सकता है मेरी प्रोपोज़ल में ही कुछ कमी होगी तो मैंने थोड़ा सा उसको डेकोरेट कर दिया। उसको अच्छे कागज लगा दिए और कर दिया तो मैंने उनको टेबल ऑफ कॉन्टेक्ट भेज के और पहला चैपटर बना के भेज दिया उनको।

तो सब इस बार ही क्या हुआ? आप मेहनत करते हो तो कभी ना कभी तो कोई रंग लाती है। मेहनत सब इस बार भी तो बहुत जबरदस्त चीज़ हुई। उन्होंने मेरी किताब बिना खोले ही मुझे वापस भेज दिया। Reject कर के बिना खोलें। तो मेरे को उस पे लिखते है की बोले तुम जैसे लोग 1000 लोग आते हैं हर हफ्ते। जो ऑथर बनना चाहते है आई ऐम सॉरी आप पूरी किताब का भेजिए क्योंकि मैंने सिर्फ एक चैपटर भेजा था। तो मेरे को चिट्ठी उन्होंने वापस भेज दी और मेरा लिफाफा भेज दिया वापिस तब इस बार ही मेरे को बहुत तकलीफ। तकलीफ ये हुई कि भैया एक पहला चैपटर पढ़ के तो देख लेते ना पसंद आता तब पढ़ के रिजेक्ट कर देते बिना पढ़े ही रिजेक्ट कर दिया।

गुस्से में मैंने उनको चिट्ठी लिखी कि

तो सब इस बार ही गुस्से में मैंने उनको चिट्ठी लिखी कि अगर मेरा पहला चैपटर आपको अच्छा नहीं लगा तो बाकी नौ चैपटर भी अच्छे नहीं लगेंगे। 10 चैपटर की किताब है भाई। आई ऐम नॉट गोइंग टु सेंड यू मी बुक पब्लिश भी करना चाहेंगे तो भी मैं नहीं आपको भेजूंगा। ऐसे पब्लिशर्स को भी ऑथर शिक्षा नहीं लिखते। इस तरीके से खास तौर पर रिजेक्टेड ऑथर्स तो जब उनको मेरी चिट्ठी मिली। तो इट वास् न् यूज़लेटर तो कहते है की ठीक है, वी विल रीकन्सीडर अपनी किताब भेजिए। पहला चैपटर के साथ तो साहब जब मेरा पहला चैपटर पढ़ा उन्होंने। तुमको अच्छा लगा, बोले वॉन्ट टू परसों फर्दर आप बाकी झपटी भेजिए। लेटस मीट अपन को फॉर्वर्ड हमारी एक्स्चेंज हो गई।

आगे पीछे तो इवन चली हमने उनके साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। करने के बाद हमने कहा, किताब किताब छापने लगे साहब की 1000 कॉपी छापी साहब उन्होंने। और छह कॉपी मुझे दी, बोले अब कॉन्ग्रैचुलेशन आप बन गए साहब। अब साहब मैंने सोचा कि मैं तो Auther बन गया जहाँ जाऊं मैं अंदर स्पीक इन गेज मेंट मैं बुक शॉप पे चला जाता था तो मैं उनसे पूछ रहा था की भैया किताब है वो बोला मेरे से पूछते थे यू कैन क्या यू कैननॉट मैंने कहा भाई यू कैन विन यू कैननॉट मैंने कहा किताब नहीं होगी भाई। मैंने कहा, हो सकता है ऑथर के नाम से जानते हो मेरे को तो मैंने कहा भाई शिव खेड़ा की किताब लिखी हुई है तो बोले शिव what ।

दुबारा से बोला तो मैंने तीसरी बार ये बोला की भैया की किताब है। उनका तो नाम सुना है उन्हें हाँ सब सुना है, लेकिन किताब नहीं है। आपकी तो मैं के पास वापस गया। मैंने बोला की भैया देखिये मेरी किताब कहीं पर नहीं है। जहाँ जाता हूँ मेरी किताब ही नहीं दिखती है। किसी दुकान में तो दिखेगी कैसे? उन्हें साहब आपकी किताब को ही रखना नहीं चाहता। मैंने कहा क्यों बोले अननोन ऑथर की किताब कोई नहीं रहता। गिव स्पेस देर मैंने कहा कोई ऐडवर्टाइजमेंट करो, प्रमोशन करो, बोले हमारे पास पैसे नहीं है एडवर्टाइज।

किताब भेजनी शुरू करी

मैंने कहा भाई एक काम करो ऐडवर्टाइजमेंट के लिए नहीं है तो करदो कहीं भेज दो किताब मेरी फॉर रिव्यु ऑनली बोले ना उसके भी पैसे नहीं है, कोरियर के चार्जेज लग जाते हैं तो मैंने कहा भैया काम करो मेरे से ले लेना, पैसे रॉयल्टी से काट लेना। अगर कुछ रॉयल्टी होगी तो अरेबिका गिनी तो रॉयल्टी कहा से हो? तो मैंने कहा साहब शुरू तो करो तो सब किताब भेजनी शुरू करी, हम लोगों ने रिव्यु पे। कुछ दिनों के बाद। मलेशिया में एक सबसे बड़ा पेपर है। तो उनको रहने मेरे को फुल फेज रिव्यु दिया। फुल पेज अब एक अननोन ऑथर के लिए फुल पेज रीव्यू एक बहुत बड़ी चीज़ होती है, लेकिन।

एक मलेसिआ के पेपर ने फुल रिव्यु beja ध्यान दीजिये हेडलाइन में क्या लिखा? बोले डोंट बाइ दिस बुक मैं समझ में नहीं आयी शिव खेड़ा ने कोई नई चीज़ नहीं लिखी है। इस ओल्ड वाइन इन न्यू मॉडल दैट्स इट ओर नीचे लिखा मनी डोंट buy थिस book । तो सब हो कटिंग बना के मेरे दफ्तर में भेजी सिंगापुर ऑफिस में। मैं शायद ट्रैवल कर रहा था, उस टाइम तो मेरी वाइफ ने पढ़ा उसको और उसने फोल्ड करके फ़ाइलों के नीचे दबा दिया। मुझे बताया भी नहीं, मैं वापस आया तो 2 साल के बाद हम लोग दफ्तर मूव कर रहे थे। और मैं जब जैसे कागज साफ कर रहा था तो फ़ाइलों के नीचे ये पूरी पेज की कटिंग निकली तो मैंने अपनी वाइफ से पूछा। की ये क्या है तुने पढ़ा हुआ है? बोले हाँ, मैंने तो रखा है वहाँ पर। तो मैंने कहा तुमने बताया क्यों नहीं? मुझे तो मेरे को कहती है मेरी वाइफ तुम को बताने की जरूरत क्या है व्हाट इस दी पॉइंट यू आर वर्किंग? सो हार्ड आप इतना काम कर रहे हो ईमानदारी से अट थिस इस ए नेगेटिव थिंग उनके कहने से हमारी किताब खराब थोड़ी हो जाती है इसलिए मैंने बताया नहीं।

बिकम बेस्टसेलर

इतने टाइम में मेरी किताब बन चुकी थी माइ बुक हैड बिकम बेस्टसेलर बी दैट टाइम। इंसिडेंट से मैं एक चीज़ सीखी। हिसाब आप अच्छा काम करोगे। निंदा करने वाले निंदा करेंगे। बुरा करोगे? निंदा करने वाले निंदा करेंगे। सब अच्छा काम करते जाओ, निंदा की परवाह ना करो और आगे बढ़ते जाओ। यही सीखा मेरे सामने साफ। मेरी किताब तो इंटरनेशनल बेस्टसेलर बन चुकी थी, लेकिन मुझे यह नहीं मालूम था कि मेरी जिंदगी में एक और बहुत बड़ी चुनौती मेरी इंतजार कर रही है। मैंने इंडिया में ऑफिस खोला 1994 मैं कुछ साल चलते काफी स्ट्रगल हुई। फिर क्योंकि मेरा हमेशा दिल था तो सर आपके कंट्री और कोई किसी तरीके से अपने देश के अंदर हम लोग क्या बदलाव ला सकते हैं? और करते करते सब मेरी इन्कम बंद हो गई। इसी काम में लग गए और मैं एक पॉलिटिकल पार्टी का मुझे प्रेसिडेंट चुन लिया गया। और मेरे पे गरजे चढ़ने शुरू हो गए, काम बंद हो गया और ग्रेजुअली आई टॉक लोन्स फ्रॉम मी पॉलिसीस रिटायरमेंट प्लेन्स।

सब खत्म हो गए सो साहब जैसे हालात बदलते गए। मुश्किल आती रहीं और करोड़ों रुपये के कर्ज है। हमारे पे चढ़ते गए और फिर मैंने यहाँ पर बैंक से आई सी आई से तो 5,10 crore का यहाँ से भी लोन ले लिया। ई एम आई पे करने में दिक्कत पड़नी शुरू हो गई। मुझे तकरीबन आई गॉट इट टु आप औं ट देर वास् डिफॉल्टर वहाँ पे और बल्कि मेरा मकान जो था वो भी डिपॉजिट होने आ गया तो मैंने सोचा कि मुझे वापस जाना पड़ेगा ऐंड मैंने उस टाइम पॉलिटिकल पार्टी से किया दो वजह से एक फॉर हेल्थ, रीज़न ऐंड फाइनैंशल रीजन्स। आई हैड टू गो थ्रू सम बाईपास इस इन्फैक्ट आई टू स्टैटस इन माइ हार्ट ऐट टाइम ऐंड फाइनैंशल ली एकदम मुझे दिक्कत पड़ गई तो खैर उसके बाद दुबारा से मैंने काम शुरू किया। ये तीसरा पड़ाव था जहाँ पर मैं एक माइनस में चला गया।

वी स्टार्टेड लाइफ ओवर अगेन

जिंदगी में ऐंड एज वास् नॉट मी साइड। ऐसा क्या? मूविंग कर लों बट फिर भी गॉड बॉस वी स्टार्टेड लाइफ ओवर अगेन ऐंड आज की तारीख में विथ गॉड ग्रेस वी हैव सोल्ड इन एक्सेस ऑफ 10 मिलियन कॉपी ज़ ऑफ बुक्स ऑफिशियली और आर ऑफिशियली जो नंबर्स है देर इस मोर थान हाफ बिलियन बुक्स ऑलरेडी बीइंग सोल्ड प्लस। 2 साल साहब जो हमारे पर चढ़े हुए थे। तकरीबन पिछले तीन 4 साल के पहले ही 5 साल पहले मैंने लास्ट अपनी इन्सटॉलमेंट अपने लोन्स के क्लियर की है। अमेरिका में तो अब ऐसा है की। कॉर्पोरेट ट्रेनिंग हम करते है विथ फॉर्चूनर 500 कम्पनीज़ इन 20 डिफरेंट कंट्रीज़ गॉड हैज़ बीन काइन्ड ऐंड अभी आईआईएम नागपुर कॉन्ट्रैक्ट में 10 ऐंड वी हैव पार्ट विथ देम टू जीतेश उनके बच्चे हैं एमबीए स्टूडेंटस एवरीबडी इट्स मैनडेटरी।

टू गो थ्रू आप प्रोग्राम बिना लीडरशिप प्रोग्राम और आज की तारीख में हमारा एक ही लक्ष्य है कि अगर आज के यूथ को हम यह संदेश दे पाए कैसे की बहुत अच्छी बात। और यूज़ डस नॉट मेक 100% पोपुलेशन ऑफ द कंट्री बट दे डू मेक 100% फ्यूचर ऑफ द कंट्री सो मेरा एक लक्ष्य एक मिशन यही है की आज के यूथ को जो मैंने पिछले 50 साल में सीखा है जो गलतियाँ की हैं। अपने यूथ को यह सीखा दे की ये गलतियाँ दोबारा से ना करें। If i कैन मेक फ्यूचर लीडर्स ऑफ इंडिया मैं सोचता हूँ कि मैंने अपने देश को एक ईमानदारी से देश भक्ति निभाई है। सब मैं अपनी जिंदगी क्यों शेयर करता हूँ आपके साथ वो इस वजह से? की मैं अपनी जिंदगी में सब जगह पर फेल होता चला गया। और सारी दुनिया को दोषी ठहराता गया। यह नहीं समझा कि मैं ही अपनी सबसे बड़ी समस्या खुद ही था। कई बार में कोई बदलाव नहीं आया।

मेरी जिंदगी की डायरेक्शन बदल गई

अंदर एक बदलाव आया और मेरी जिंदगी की डायरेक्शन बदल गई। पहला सेलेक्शन और दूसरा लेसन था। जब मेरे मैनेजर ने मुझे कहा यू शट अप इन लिसन टू मी उस दिन समझ में आयी की कभी कभी जिंदगी में। कठोर बनना पड़ता है अच्छा करने के लिए। समटाइम्स इन लाइफ यू गॉट टू बीन टाइम टु बी काइन्ड कभी कभी जिंदगी में कठोर बनना पड़ता है अच्छा करने के लिए। और तीसरी चीज़ सब हम लोग की अपॉइंटमेंट तकरीबन एक हफ्ता पहले बनी होती थी। मैंने देखा है तकरीबन 90% लोग जो आज बिज़नेस वर्ल्ड में है, दे डोंट हैव पॉइंट वन वीक इन ऐडवान्स एक हफ्ता फाइल साहब अपॉइन्टमेंट ही नहीं है तो मेरी समझ में एक चीज़ आयी की अगर आप सुबह उठते हैं स्टार asking योरसेल्फ लेट मी सी व्हाट आई हैव टुडू टुडे? यू आर अनएम्प्लॉयड विथ जॉब? यू आर अनएम्प्लॉयड विदा जॉब। 90% पीपल आर लाइक दैट।

ऐम नेक्स्ट लेसन फॉर एलर्ट वास। सब माई लाइफ इन्श्योरेन्स बेचता था। आई वास् 100% कमिशन। अगर मैं देखता नहीं था तो मुझे पैसे नहीं मिलते थे और पैसे थे नहीं हमारे पास। लेकिन मैंने देखा कि हमारी कंपनी में कुछ लोग तन्खा लेते थे लेकिन काम नहीं करते थे। तब मेरी समझ में आयी कि देर इस ए बिग डिफरेन्स बिट्वीन मेकिंग मनी वर्सिस अर्निंग मनी। मेकिंग मनी इस क्रिमिनल अर्निंग मनी स्पिरिचुअल सब पैसा बनाने में और पैसा कमाने में बहुत फर्क है। पैसा बनाना चोरी है। पैसा कमाना ईमानदारी है। और इसमें फर्क क्या है सर? वेन्यू अर्नमनी जब आप कमाते हो यू पुट योर एनर्जी एट ethics बिहाइन्ड द वर्डस। वेन्यू अनमनी जब पैसा कमाते हो भैया, आप अपनी एनर्जी और एथिक्स ईमानदारी उसके पीछे लगाते हो? उसको कहते हैं पैसा कमाना।

बिना काम के चोरी के सामान है

सब एक स्टडी हुई अमेरिका में Gallep के बाद तो Gallep ने बताया की तकरीबन 63% ऑफ पीपल हूँ। गुड? जो लोग काम करने जाते है 63% जा के अपना काम नहीं करते साहब। ऐडिशन 24% और ऐक्टिविटी नब्ज़ वो दूसरों को भी कम का नहीं करने देते। दे डोंट लाइक अवर्स टू थे जॉब ऑल्सो। ओनली 13% ऑफ पीपल हूँ गो टू वर्क ऐक्चूअली डू वर्क। ओनली 13% ऑफ पीपल हूँ गो टू वर्क ऐक्चूअली टू वर्क टेल मी? इस थिस नॉट इंटेग्रिटी इश्यू क्या ईमानदारी का सवाल नहीं है। सब हम लोग को दोबारा से सोचना पड़ेगा। वे जीस विदाउट वर्क, स्टील बिना काम के चोरी के सामान है। एक और स्टडी वही से।

दैट आज की तारीख में विथ करंट जेनरेशन सोशल मीडिया पर लोग जो काम पे जाते हैं देश में 2 टु 3 आर्म्स पर डे। इन द पर्सनल सोशल मीडिया। आप बताइए क्या इसी के हमको पैसे मिलते हैं इस दैट वी अर गेटिंग फेड फ़ोर। सब कोई आपका बटुआ निकाल लें। आपकी जेब से आप क्या कहेंगे? उसको चोर कहते हैं और जब हम लोग यही काम करते हैं, हम लोग क्या है अभी तो चोरी है। सब अक्सर लोग कहते हैं कि मैं एक स्टोरी सफलता चाहता हूँ, एक स्टोरी जिंदगी चाहता हूँ, एक स्टोरी इनकम चाहता हूँ सब उनको अपने आप से ये सवाल पूछना होगा कि भैया, क्या आप एक्स्ट्राऑर्डिनरी इंसान हो? क्या आप एक्स्ट्राऑर्डिनरी मेहनत करने को तैयार हो? क्या आपके अंदर एकएक्स्ट्राऑर्डिनरी ईमानदारी है? क्या आपके अंदर एक स्ट्राइक कमिटमेंट है अगर आपके अंदर एक्स्ट्राऑर्डिनरी कुछ नहीं है तो भैया आपको एक्स्ट्रा नहीं ज़िन्दगी कुछ नहीं मिले गी आपको कुछ बनना है जिंदगी में कुछ हासिल करने के लिए वो कहते हैं पात्र कटोरा नहीं होगा तो भैया खली हात क्या करोगे

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