What is the story behind rolls royce

ख़ुदा का ख़ौफ़ और Rolls-Royce की शानदारी

बचपन में स्कूल नहीं गया, बड़े होने पर खड़ी कर दी रोल्स-रॉयस की शुरुआत

जिन्दगी में कई बार वो पल आते हैं जब हम सोचते हैं, ‘अगर ख़ुदा बना सकता है तो रॉयस-रॉयस क्यों नहीं?’ जी हां, वह कार जिसके लिए हज़ारों करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है, Rolls-Royce Boat Tail, उसकी क़ीमत करीब 206 करोड़ रुपये है। खरीदनी हो तो बड़ी हैसियत चाहिए इसके लिए, सबके बस की बात थोड़ी है। सिर्फ यही कार नहीं, लग्जरी ब्रैंड रोल्स-रॉयस की कारों को कुछ चुनिंदा लोग ही ले सकते हैं।

कभी सपना, अब हकीकत

अब इसकी सबसे एक्सक्लूसिव कार को ही देख लीजिए। नाम है, Rolls Royce Cullinan Black Badge, 10 करोड़ से क़ीमत शुरू है इसकी। भारत में सिर्फ 3 लोगों के ही पास है। इसकी सबसे सस्ती कार रैथ (Rolls-Royce Wraith) भी 5 करोड़ की है। जिस पल यह कार सड़क से गुजरती है, आस-पास के लोगों की निगाहें बस इस पर ही टिक जाती हैं। तब तक, जब तक कि आंखों के सामने से ओझल ना हो जाए।

एक कहानी की शुरुआत

जितनी दिलचस्प इस लग्जरी ब्रैंड की कारें हैं, उतनी ही दिलचस्प कहानी है इस कंपनी के बनने की, जो एक मुलाकात से शुरू हुई थी। लेकिन, उस मुलाकात को जानने से पहले उसके पीछे की कहानी समझना ज़रूरी है।

दो नाम, एक मिशन

रोल्स-रॉयस कंपनी को बनाने वाले दो लोग हैं- हेनरी रॉयस (Henry Royce) और चार्ल्स रोल्स (Charles Royce)। इस कहानी की शुरुआत इंग्लैंड के पीटरबोरोह (Peterborough) से होती है, जहां हेनरी रॉयस का ग़रीब परिवार रहता था। अपने 5 भाई-बहनों में वह सबसे छोटे थे। कुछ बेहतर की तलाश में पूरा परिवार लंदन शिफ्ट हो गया था।

सपनों का परिपूर्णता का सफर

थोड़ा समय ही बीता था कि 1872 में हेनरी रॉयस के पिता की मौत हो गई। इसके बाद, वह अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मेकेनिक का काम करने लगे। यही समय था जब वह ऑटोमोबाइलों के प्रति अपनी गहरी रुचि का एहसास करने लगे। वे ऑटोमोबाइलों की ज़मीन पर ही बने बनाए गए बड़े इंजनों की अध्ययन करने लगे, और उन्होंने ख़ुद को एक मास्टर मेकेनिक के रूप में साबित किया।

चार्ल्स रोल्स: रोल्स-रॉयस की मुद्दत

इसी समय एक और चार्ल्स रोल्स नामक युवक भी ऑटोमोबाइलों में अपना इंटरेस्ट दिखाने लगे थे। चार्ल्स का जन्म 1877 में हुआ था, और वह बीस साल की आयु में ही एक इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू कर चुके थे। इन दोनों के बीच एक मिलकर काम करने का सपना था, जिसमें एक अत्यधिक मानक वाहन बनाने की ख़ुद एक गाड़ी बनाने की ख़वाहिश थी।

मिलकर आगे बढ़ने की कहानी

1904 में, हेनरी रॉयस और चार्ल्स रोल्स की मिलकर कंपनी Rolls-Royce Ltd. का गठन हुआ। इस दौरान, वे अपनी पहली कार, Rolls-Royce 10 hp, का निर्माण करने में सफल रहे। यह कार एक वाहन के रूप में केवल एक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि एक आदर्श बन गई थी, जो शानदार डिज़ाइन और उत्तम कार्यक्षमता का प्रतीक था।

Rolls-Royce: एक अमूल्य ब्रांड

वर्षों के साथ, Rolls-Royce ने एक अमूल्य ब्रांड का नाम कमाया है, जिसे बॉलिवुड सितारों से लेकर विश्व के शक्तिशाली लोगों ने अपनाया है। रोल्स-रॉयस की कारें केवल एक ट्रांसपोर्टेशन के साधन के रूप में नहीं देखी जाती, बल्कि एक स्टेटमेंट ऑफ लक्ज़री के रूप में भी।

रोल्स-रॉयस का यह सफर हमें दिखाता है कि अगर किसी चीज़ के पीछे जज़्बा, आत्मविश्वास और मेहनत हो, तो कुछ भी मुमकिन है। यह न केवल एक कार की कहानी है, बल्कि एक ब्रांड की महाकवि है, जो शानदारता की नई परिभाषा देता है।

Rolls-Royce के रोचक तथ्य

  • Rolls-Royce का लोगो है “स्पीरिट ऑफ एक्स्टेंस” (Spirit of Ecstasy), जो बॉनेट पर स्थापित होता है।
  • Rolls-Royce की कारें हाथ से बनती हैं, और इसमें करीब 60,000 से अधिक स्क्रू और बोल्ट होते हैं, जिन्हें हाथ से ताक़त से बंद किया जाता है।
  • यह कंपनी अपने ग्राहकों के लिए अत्यधिक पैर्सनलाइज्ड कारें बनाती है जो विशेष डिज़ाइन और फीचर्स के साथ आती हैं।
  • Rolls-Royce की कारें विश्व के सबसे शांत कारें मानी जाती हैं, और इनमें एक विशेष गौर से डिज़ाइन किए गए सस्पेंशन सिस्टम के कारण इस शांति का अहसास होता है।

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